पीलीभीत। पीटीआर की महोफ रेंज में लंगड़ाकर चलने वाली बाघिन चार दिन बीतने के बाद भी विभाग की पकड़ में नहीं आ सकी। रेस्क्यू करने की अनुमति मिलने के बाद चार टीमें और 15 कैमरों से निगरानी के बाद भी विभाग बाघिन को पकड़ने में सफल नहीं हो सका है।
अफसरों का कहना है कि मंगलवार सुबह बाघिन की चहलकदमी देखे जाने के बाद सतर्कता बढ़ाई गई, लेकिन फिर उसकी कोई लोकेशन नहीं मिल सकी। टीमें निगरानी में जुटी हैं।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व की महोफ रेंज में बाघिन के लंगड़ाकर चलने का मामला सामने आने के बाद अफसरों की ओर से निगरानी शुरू की गई थी। पैर से कमजोर बाघिन के कमजोर दिखाई देने और पर्यटन क्षेत्र में सुरक्षा बिंदुओं का ध्यान रखते हुए उसको रेस्क्यू करने की अनुमति ली गई। इसके बाद विभाग की चार टीमों को निगरानी के लिए लगाया गया।
बाघिन को कैद करने के लिए पिंजरा लगाकर उसमें बकरी को बांधा गया। कहा गया कि बाघिन को पहले पिंजरे में कैद करने पर जोर दिया जाएगा। दो दिन बाद मंगलवार सुबह बाघिन की चहलकदमी दिखाई दी।
इसके बाद निगरानी में जुटी टीमें अलर्ट हुई थी। बाघिन को रेस्क्यू करने के प्रयास शुरू किए गए, लेकिन बाद में बाघिन की चहलकदमी दिखाई न देने से विभाग के प्रयास सफल नहीं हो सके। डीएफओ भरत कुमार डीके ने बताया कि बाघिन की निगरानी जारी है। मंगलवार को एक बार उसकी चहलकदमी दिखाई दी थी। इसके बाद प्रयास तेज कर दिए गए थे, लेकिन बाद में लोकेशन नहीं मिल सकी। क्षेत्र में पिंजरा लगा दिया गया है।
बाघिन को लालच देने के लिए उसमें बकरी को बांधा गया। रात में बाघिन पिंजरे के करीब नहीं पहुंची। स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। लोकेशन ट्रेस होने के बाद बाघिन को रेस्क्यू करने पर अमल किया जाएगा। विभागीय टीम उसको पकड़ने में सफल नहीं हो पा रही है। चार टीमों के अलावा 15 कैमरे लगाकर निगरानी के बावजूद बाघिन विभागीय पकड़ से दूर है।
अफसरों का कहना है कि मंगलवार को बाघिन की चहलकदमी के बाद सतर्कता बढ़ाई गई थी, लेकिन फिर उसकी कोई लोकेशन ट्रेस नहीं हो सकी है।