बाघिन पकड़ने के लिए लगाया गया पिजरा
टाइगर रिजर्व में चार माह में खूनी बाघिन ने चार लोगों को अपना शिकार बनाया है। इससे पहले बाघिन पिपरिया संतोष के दो एवं डगा गांव के एक व्यक्ति का शिकार कर चुकी है। लगातार बढ़ रहे हमलों से ग्रामीणों में दहशत है। ठंड शुरू होने के साथ ही बाघ बाघिन का जंगल से बाहर आना आम बात है, लेकिन इस बार ठंड के दिनों में बाहर आई बाघिन जंगल से सटे इलाके के लोगों के लिए मुसीबत बनी है। 27/28 नवंबर 2016 की रात बाघिन ने गांव पिपरिया संतोष के 52 वर्षीय बाबूराम को अपना पहला शिकार बनाया था। हमले के समय बाबूराम खेत की सिंचाई करने के बाद खेत पर ही डनलप के नीचे सो रहे थे। इसके बाद इसी बाघिन ने 11 दिसंबर को पिपरिया संतोष से कुछ दूरी पर स्थित गांव डगा के 22 वर्षीय अहमद खां को हरदोई ब्रांच से पानी लेने जाते समय मार डाला था। वन विभाग और ग्रामीणों द्वारा घेराबंदी और निगरानी किए जाने पर बाघिन पुन: पिपरिया संतोष के निकट पहुंची और 16 जनवरी 2017 की शाम को गांव के ही 17 वर्षीय राजीव को गन्ना तोड़ते समय मार डाला था। इस घटना के बाद से बाघिन की चहलकदमी क्षेत्र में बनी रही। अब पिपरिया संतोष गांव से करीब आठ किमी दूर शाहगढ़ क्षेत्र के गांव कुुंवरपुर पहुंची बाघिन ने शनिवार की रात धनीराम को अपना शिकार बनाया। ग्रामीणों की मानें तो तीन दिनों से बाघिन की चहलकदमी चल रही थी।
टाइगर रिजर्व बनने के बाद पांचवीं मौत
बाघिन के इन चार हमलों से पूर्व महोफ रेंज के मरौरी गांव में एक बाघ ने खेत पर गए किसान 34 वर्षीय बेनीराम पर हमला कर मार डाला था। इसे मिलाकर टाइगर रिजर्व में पांच माह में बाघ-बाघिन के हमले में पांच लोगों की जान जा चुकी है।
15 साल पहले धनीराम पर भालू ने किया था हमला
कुंवरपुर निवासी धनीराम पर करीब 15 साल पहले जंगल में भालू ने हमला कर दिया था। इस हमले में वह घायल हो गया था। भालू के हमले के निशान उसके चेहरे पर मौजूद थे। उस हमले में तो वह बच गया था, लेकिन इस बार उसे जान गवानी ही पड़ी।