चार लोगों का शिकार कर चुकी बाघिन की दहशत बढ़ने के साथ ही लोगों ने इसे आदमखोर घोषित करने की मांग शुरू कर दी है। वहीं वन विभाग इसे आदमखोर घोषित कराने से ज्यादा ट्रैंक्युलाइज कर पकड़ने की तैयारी में है। इसके लिए बाघिन की मानीटरिंग के साथ पिंजरे व जाल लगाए गए हैं। जंगल या इससे बाहर आए बाघ अमूमन सीधे हमला नहीं करते हैं। प्राय: ऐसी घटनाएं वह अपने बचाव के लिए करते हैं लेकिन जब बाघ के सीधे हमले होने लगते हैं तो यह माना जाता है कि बाघ के मुंह में मनुष्य का खून लग गया है। ऐसी घटनाएं लगातार होने पर उसे आदमखोर घोषित कराने की कवायद शुरू होती है। हालांकि चार लोगों का शिकार कर चुकी बाघिन को आमदखोर घोषित कराने की मांग उठने लगी है लेकिन विभाग उसे आदमखोर घोषित कराने से ज्यादा पकड़ने पर जोर दे रहा है। इसके लिए रविवार सुबह से ही कवायद की जा रही है। पिजरा और गन्ने के खेत में जाल लगाने के साथ कैमरे भी लगाए गए हैं।
क्या है आदमखोर घोषित करने का नियम
कोई भी बाघ/बाघिन तब आदमखोर घोषित किया जाता है जब उसे पांच या छह लोगों को मारने के बाद उसका मांस खाया हो साथ ही इस बीच उसने किसी अन्य पशु का शिकार न किया हो। इसके लिए एक्सपर्ट उसकी गहन जांच करते हैं। धनीराम को मारने वाली बाघिन के मामले में ऐसा प्रतीत नहीं हो रहा है। बाबूराम पर हमले के बाद से धनीराम पर हुए हमले के बीच क्षेत्र के कई लोगों के पशुओं को बाघिन ने शिकार बनाया है।
बाघिन को पकड़ने का प्रयास
टाइगर रिजर्व के एसडीओ केपी सिंह ने बताया कि चारों हमले एक ही बाघिन ने किए हैं यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल बाघिन को पकड़कर चिड़ियाघर में छोड़ने की योजना पर विचार किया जा रहा है। अधिकारियों से मंत्रणा के बाद आगे की रणनीति बनाई जाएगी।