गुरुवार रात बैगन की सब्जी खाकर सोए दंपति और दो बच्चों की शुक्रवार सुबह हालत बिगड़ गई। घर के मुखिया ने पत्नी और बच्चों को लड़खड़ाता देख ग्राम प्रधान को सूचना दी। आनन फानन में सभी को बेहोशी की हालत में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। करीब तीन घंटे बाद हालत सामान्य होने पर उन्हें घर भेज दिया गया।
गांव आसपुर निवासी 36 वर्षीय संतोष कश्यप गुरुवार को बाजार से बैगन खरीदकर लाए थे। शाम को उनकी पत्नी ने बैगन और आलू-टमाटर की सब्जी बनाई। संतोष, उनकी पत्नी रेखा देवी और नौ वर्षीय पुत्री लक्ष्मी ने बैगन की सब्जी खाई थी। संतोष के मुताबिक उनके पांच वर्षीय पुत्र शिवा ने बैगन की सब्जी से सिर्फ एक निवाला खाया जबकि पुत्री सृष्टि ने बैगन की सब्जी न खाकर आलू-टमाटर की सब्जी से खाना खाया। खाना खाने के बाद पूरा परिवार सो गया। संतोष ने बताया कि शुक्रवार सुबह पांच बजे आंख खुलने पर जब वह चारपाई से उठे तो पांव डगमगाने लगे। पत्नी रेखा को आवाज देकर उठाया तो उन्होंने भी तबियत खराब होने की बात कही। वह भी ठीक से खड़ी नहीं हो पा रही थीं। बेटी लक्ष्मी और बेटे शिवा की हालत भी खराब थी जबकि बेटी सृष्टि ठीक थी। अनहोनी की आशंका पर संतोष ने ग्राम प्रधान रामगोपाल को सूचना दी। प्रधान ने 108 एंबुलेंस को बुलाकर चारों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाकर भर्ती कराया। इलाज के करीब तीन घंटे बाद सभी की हालत सामान्य होने पर उन्हें घर भेज दिया गया।
सब्जियों में बेतहाशा कीटनाशक दवाओं का प्रयोग किया जा रहा है। सब्जियों को समय से पहले तैयार करने के लिए उनमें घातक इंजेक्शनों का भी इस्तेमाल हो रहा है। संभवत: बैगन में भी कीटनाशक दवा का असर रहा होगा। इसी के चलते इन सभी की हालत बिगड़ी।
-डॉ. विनीत यादव, चिकित्साधिकारी, पीएचसी