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Pilibhit News: फर्जी फर्म बनाकर करोड़ों की जीएसटी चुराने वाले गिरोह का भंडाफोड़, चार आरोपी गिरफ्तार

Sat, 06 Jun 2026 03:06 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
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फर्जी जीएसटी फर्म बनाने के मामले में पकड़े गए आरोपी। स्रोत विभाग
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पीलीभीत। जीएसटी चोरी के माधोटांडा थाने में दर्ज नौ महीने पुराने मामले में विवेचना के बाद पुलिस ने फर्जी जीएसटी फर्म बनाने वाले अंतरराज्यीय गिरोह से जुड़े दिल्ली के चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में आरोपियों ने फर्जी फर्में बनाने, जीएसटी पंजीकरण और कर चोरी का खुलासा किया है। यह गिरोह हर साल सौ से अधिक फर्जी फर्म बनाकर करोड़ों के राजस्व को नुकसान पहुंचा रहा था।
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एएसपी नताशा गोयल ने प्रेसवार्ता में बताया कि राज्य कर विभाग के सहायक आयुक्त ने माधोटांडा थाने में पिछले साल अगस्त में बूंदीभूड़ गांव के रामसरेश के खिलाफ रिपोर्ट लिखाई थी। इसमें कहा गया था कि बूंदीभूड़ के पते पर दर्ज आरएसआर ट्रेडर्स कंपनी में केवल कागजी लेनदेन दिखाकर फर्म मालिक रामसरेश राजभर ने फर्जी आईटीसी का लाभ लिया था। इससे 3.61 करोड़ रुपये से अधिक की क्षति हुई थी। विभागीय जांच में रेडीमेड कपड़ों के व्यापार की कोई ठोस व्यावसायिक गतिविधि नहीं मिली।

इस मामले को गंभीरता से लेकर क्राइम ब्रांच को विवेचना सौंपी गई। जांच के दौरान सामने आया कि दिल्ली का एक संगठित गिरोह इस पूरे मामले में संलिप्त है। जांच में उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के स्वरूप नगर निवासी हरिओम, विपिन जैन, दीपक चौधरी और बच्चू के नाम सामने आए। शुक्रवार को क्राइम ब्रांच की टीम ने माधोटांडा पुलिस के साथ मिलकर इन चारों को गिरफ्तार कर लिया। गिरोह का एक अन्य सदस्य चंदन मिश्रा मैनपुरी जिला कारागार में बंद है। पुलिस ने आरोपियों को कोर्ट में पेश कर जेल भेजा है। पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों और उनके नेटवर्क की जानकारी जुट रही है। 
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ऑनलाइन विज्ञापन के जरिये बटोरते थे दस्तावेज
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे लोग ऑनलाइन विज्ञापन के जरिये नौकरी लगवाने, बिजली बिल सही करने समेत अन्य प्रलोभन देकर लोगों के आधार कार्ड, पैन कार्ड, बिजली बिल, मोबाइल नंबर व अन्य दस्तावेज हासिल कर लेते थे। ओटीपी प्राप्त करने के बाद उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर फर्जी फर्मों का पंजीकरण कराया जाता था। गिरोह के कुछ सदस्य तकनीकी माध्यमों से जीएसटी पोर्टल पर फर्मों का रजिस्ट्रेशन कराते थे, जबकि अन्य सदस्य आवश्यक दस्तावेज तैयार कर उन्हें आगे उपलब्ध कराते थे। इसके बाद फर्जी फर्म तैयार की जाती थीं। प्रत्येक फर्जी फर्म के बदले तय रकम लेकर उन्हें अन्य व्यक्तियों को उपलब्ध कराया जाता था। फिर उन फर्म के माध्यम से काल्पनिक व्यापारिक लेन-देन दर्शाकर करोड़ों का टैक्स बचाया जाता था।

छह मोबाइल, नौ सिम, 15 जीमेल आईडी मिलीं
गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से छह मोबाइल फोन, नौ सिम कार्ड, 15 जीमेल आईडी और फर्मों के संचालन एवं पंजीकरण से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं।

हर साल बनाते थे 100 से अधिक फर्जी फर्में
क्राइम ब्रांच की जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्याें ने जीएसटी व्यवस्था शुरू होने के दो साल बाद इस धंधे को शुरू कर दिया था। आरोपी हर साल 100 से अधिक फर्जी जीएसटी फर्म बनाकर करोड़ों रुपये का सरकारी राजस्व को घाटा पहुंचाते थे।
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