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चार हाथियों से गन्ने के खेतों में हुई कांबिंग, नहीं मिला बाघ

Tue, 07 Mar 2017 10:34 PM IST
ब्यूरो /पीलीभीत
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चार हाथियों से गन्ने के खेतों में हुई कांबिंग, नहीं मिला बाघ
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जंगल से सटे इलाकों में आए दिन बाघ के हमले जारी है। रंपुरा और सैजनिया गांव में बाघ को पकड़ने के लिए दो दिन से प्रयास किए जा रहे है, लेकिन कामयाबी नहीं मिल सकी है। सैजनिया गांव में बाघ दिखाई देने की सूचना मिलने पर मंगलवार को चार हाथियों की मदद से वनकर्मी बाघ तलाशने में जुटे रहे। कोई सफलता नहीं मिली।
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रविवार को न्यूरिया के रंपुरा गांव में खेत पर सिंचाई करने गए बीएससी के छात्र ब्रह्मस्वरूप की बाघ के हमले में मौत के बाद वनकर्मियों से मारपीट की गई थी। सोमवार को बाघ ने पड़ोस के गांव सैजनिया में दस्तक देकर नीलगाय का शिकार किया। बाघ को पकड़ने के प्रयास किए गए लेकिन बाघ जाल फाड़कर भाग निकला था। आधा किलोमीटर की दूरी पर बसे दोनों गांवों के बीच बाघ की चहल कदमी जारी है। सोमवार रात फिर सैजनिया में बाघ की चहलकदमी हुई। ग्रामीणों ने राजीव के गेहूं के खेत के पास बाघ को देखा। इससे रात भर ग्रामीण दहशत में रहे। सुबह इसकी सूचना वन विभाग को दी गई। डीएफओ टाइगर रिजर्व कैलाश प्रकाश, डीएफओ सामाजिक वानिकी आदर्श कुमार, रेंजर राजीव कुमार, गजेंद्र, अनिल शाह, सुनील श्रीवास्तव टीम के साथ पहुंच गए। चार हाथियों की मदद से गन्ने के खेतों में कांबिंग कर बाघ को तलाश किया गया। वनकर्मियों की कार्रवाई के दौरान ग्रामीण भी मौके पर जमे रहे। देर शाम तक कांबिंग जारी रही, लेकिन बाघ का कोई सुराग नहीं लग।
खेत से निकले कुत्ते को समझा बाघ 
सैजनिया गांव में वनकर्मियों द्वारा बाघ की तलाश की जा रही थी। इस बीच एक खेत के भीतर से अचानक कुत्ता निकल आया। उसे बाघ समझ मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने शोर मचाना शुरू कर दिया। 
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दहशत के चलते खेतों पर नहीं गए किसान 
गांव में कई किसानों के खेतों में अभी गन्ने की फसल खड़ी हुई है। बाघ की दहशत के चलते ग्रामीण खेतों पर जाने से कतरा रहे है। मंगलवार को भी वनकर्मियों की कार्रवाई देखने को तो भीड़ रहीं, लेकिन गन्ना काटने के लिए किसान नहीं गए। कुछ किसानों ने कटाई करानी चाही, लेकिन मजदूरों ने बाघ के डर से इनकार कर दिया। यही नहीं तीन दिन से कांबिंग के बाद भी बाघ के न पकड़े जाने पर वन विभाग के खिलाफ भी ग्रामीणों में गुस्सा है। 
पांच टीमें बनाकर रंपुरा और सैजनियां गांव में चार हाथियों की मदद से कांबिंग कराई गई। कहीं पर भी बाघ के पगचिह्न नहीं मिले हैं। बुधवार को भी बाघ की तलाश के लिए कांबिंग कराई जाएगी।
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- कैलाश प्रकाश, डीएफओ टाइगर रिजर्व
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