पीलीभीत में अपर सत्र न्यायाधीश अनु सक्सेना ने गैर इरादतन हत्या और मारपीट के 12 साल पुराने मामले में मंगलवार को दोनों पक्षों के दोषियों को सजा सुनाई। गैर इरादतन हत्या में एक पक्ष के चार सगे भाइयों को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए प्रत्येक पर 39 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। वहीं दूसरे पक्ष के पांच दोषियों को भी छह-छह साल कैद की सजा सुनाई है। इनमें दो सगे भाई हैं। साथ ही आठ-आठ हजार रुपये का जुर्माना किया है।
पूरनपुर के मोहल्ला रजागंज के वार्ड नंबर सात निवासी मेहंदी हसन ने थाना पूरनपुर में करीब 12 साल पहले रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि 10 अक्तूबर 2013 को रजागंज देहात के चार सगे भाई शेर मोहम्मद, आजाद, शमशेर व गुलशेर अन्य लोगों के साथ दरवाजा तोड़कर उसके घर में घुसे और मारपीट की। तमंचा लहराते हुए जान से मारने की धमकी भी दी। गंभीर रूप से घायल नवाब हसन और अमीर हसन को परिजनों ने बरेली के अस्पताल में भर्ती कराया। इलाज के दौरान 25 नवंबर 2013 को नवाब हसन की मौत हो गई थी। दूसरे पक्ष के शमशेर ने भी मेहंदी हसन के अलावा चार अन्य लोगों पर मारपीट कर घायल करने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
पुलिस ने दोनों पक्षों के खिलाफ आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किए। दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने गैर इरादतन हत्या के मामले में मोहम्मद, आजाद, शमशेर व गुलशेर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। वहीं, दूसरे पक्ष के मेहंदी हसन, अमीर हसन, इरफान और सगे भाइयों शान मोहम्मद व अली मोहम्मद को मारपीट का दोषी पाते हुए कोर्ट ने सजा सुनाई।