पीलीभीत। राइस मिल संचालक की शिकायत पर इंडियन बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक समेत अन्य बैंक अधिकारियों के खिलाफ करोड़ों रुपये के वित्तीय घोटाले, फर्जी हस्ताक्षर और बैंक अभिलेखों में हेरफेर के आरोप में सुनगढ़ी पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज की है।
सिविल लाइंस नॉर्थ निवासी एवं उजैफ एग्रोटेक राइस मिल के प्रोपराइटर मोहम्मद जीशान ने दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया कि उनकी फर्म का कैश क्रेडिट (सीसी) खाता पहले इंडियन बैंक की गांधी स्टेडियम रोड शाखा में संचालित था। करीब दो वर्ष पहले इसे बंद कर पंजाब एंड सिंध बैंक में स्थानांतरित कर दिया गया।
आरोप है कि दिसंबर 2025 में तत्कालीन शाखा प्रबंधक अमित वर्मा ने 25 करोड़ रुपये तक की सीसी लिमिट स्वीकृत कराने का प्रस्ताव दिया, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया। इसके बावजूद उनकी जानकारी और सहमति के बिना करीब 19 करोड़ रुपये की सीसी लिमिट स्वीकृत कर दी गई। पूरी बैंक फाइल में उनके फर्जी हस्ताक्षर किए गए। उनकी पत्नी को भी बिना जानकारी के गारंटर दर्शाकर उनके कथित रूप से फर्जी हस्ताक्षर किए गए, जबकि उस समय वह गंभीर रूप से बीमार होकर निजी अस्पताल में भर्ती थीं।
आरोप है कि बिना किसी आवेदन या वैध बैंकिंग प्रक्रिया के करीब 13.61 करोड़ रुपये आरटीजीएस के माध्यम से पंजाब एंड सिंध बैंक भेज दिए गए। साथ ही दोनों बैंकों के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये के लेनदेन, नकद निकासी, फर्जी चेकबुक के इस्तेमाल और बैंक रिकॉर्ड और कंप्यूटर प्रणाली में हेरफेर कर धनराशि के गबन का प्रयास किया गया। खाते से भारी नकद निकासी भी दर्शाई गई है।
पीड़ित का कहना है कि वर्तमान शाखा प्रबंधक दिलीप कुमार ने 29 मई को अनियमितताओं को ठीक कराने और अवैध रूप से निकाली गई धनराशि वापस जमा कराने का आश्वासन दिया था। इस भरोसे पर उन्होंने 27 लाख रुपये ओवरड्यू राशि जमा कर दी और वैकल्पिक संपत्ति के दस्तावेज भी बैंक कर्मचारी को उपलब्ध करा दिए, लेकिन बाद में कोई कार्रवाई नहीं की गई। सीओ सिटी अमरनाथ वर्मा ने बताया कि मामले में केस दर्ज हुआ है। थाना पुलिस को साक्ष्यों के आधार पर विवेचना पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। संवाद