नोमैंस लैंड क्षेत्र में नदी का प्रभावित इलाका। संवाद
कलीनगर। भारत-नेपाल सीमा से सटे नोमैंस लैंड क्षेत्र में ग्रामीणों के आंदोलन और अधिकारियों के आश्वासन के बाद भी बाढ़ से बचाव कार्य शुरू नहीं हो सके हैं। ऐसे में मानसून का समय नजदीक आते ही ग्रामीणों की चिंताएं बढ़ गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले साल भी नदी ने क्षेत्र में बनी बाढ़ परियोजनाएं के अलावा आबादी क्षेत्र में भी नुकसान पहुंचाया था।
कलीनगर क्षेत्र के नोमैंस लैंड से सटे इलाके में स्थित नौजल्हा नंबर दो गांव शारदा नदी के मुखाने पर है। नेपाल से भारतीय सीमा में प्रवेश करने के बाद नदी नौजल्हा क्षेत्र से होकर आगे गुजरती है। गत वर्ष नदी ने नोमैंस लैंड से लेकर शारदा नदी के दाहिने किनारे तक तटबंध और काफी भूभाग नदी ने काट दिया था। तीन माह पूर्व क्षेत्रीय ग्रामीणों ने आंदोलन और प्रदर्शन कर जनप्रतिनिधियों, जिला प्रशासन और शासन का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित किया था।
उस दौरान जिलाधिकारी और क्षेत्रीय विधायक ने मौके पर पहुंचकर जल्द बाढ़ नियंत्रण कार्य शुरू कराने का आश्वासन दिया था, इसके बाद आंदोलन समाप्त कर दिया गया था। अब तक मौके पर कोई कार्य शुरू नहीं हो सका है। इसके बावजूद पूरा वर्ष बीतने के बाद भी सिंचाई विभाग बाढ़ खंड की ओर से यहां कोई ठोस बाढ़ नियंत्रण कार्य शुरू नहीं कराया जा सका है।
ग्रामीणों का आरोप है कि समय रहते बाढ़ नियंत्रण कार्य न होने से क्षेत्र में फिर बड़े नुकसान की आशंका बढ़ गई है। ग्रामीणों और पूर्व प्रधान विमल गुलदार का कहना है कि यदि समय रहते यहां बाढ़ नियंत्रण कार्य नहीं कराए गए तो आगे चल रहे अन्य निर्माण कार्य भी नदी की भेंट चढ़ सकते हैं। उन्होंने जल्द कार्य शुरू कराने की मांग की है। संवाद