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शारदा की बाढ़ से हर साल 36 गांवों में मचती है भीषण तबाही

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पूरनपुर। शारदा नदी की बाढ़ से हर साल पूरनपुर और कलीनगर के 36 गांवों में भीषण तबाही मचती है। हर साल अपने बहाव का रुख बदलने वाली शारदा नदी जलस्तर बढ़ने पर कब और किस गांव की ओर अपना रुख करेगी और तबाही मचाएगी, इसे लेकर गांव वाले असमंजस में रहते हैं। बाढ़ प्रभावित इन गांवों के लोग जलस्तर बढ़ने की आशंका से पहले से ही बाढ़ से निपटने को तैयारी शुरू कर देते हैं।
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शारदा नदी के हर साल बदलते रुख से आसपास के गांव वालों में दहशत रहती है। कुछ स्थानों पर नदी की चौड़ाई का दायरा करीब पांच किलोमीटर तक है। नदी किनारे के गांवों के हजारों लोग हर साल बाढ़ से बड़े पैमाने पर प्रभावित होते हैं। इनकी खेती और फसलें नदी के आगोश में समा जाती हैं। प्रशासन बरसों से अब तक इन गांवों को बाढ़ की विभीषिका से बचाने का ठोस इंतजाम नहीं कर पाया है। हालांकि बाढ़ रोकने को लेकर कई जगह करोड़ों रुपये खर्च कर ठोकरें बनाई जाती हैं। बाढ़ नियंत्रण के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये के बजट ठिकाने लगा दिया जाता है।
ये हैं सर्वाधिक बाढ़ प्रभावित गांव
शारदा नदी से सर्वाधिक बाढ़ प्रभावित गांवों में बंदरबोझ, बूूंदीभूड़, महाराजपुर, नौजल्हा, गभिया सहराई, भूड़ा गोरख डिब्बी, कंजिया सिंहपुर, नगरिया खुर्द, ढकिया ताल्लुके महाराजपुर, रमनगरा, गुन्हान, सेल्हा, चंदिया हजारा बंगाली कालोनी, राहुलनगर, खिरकिया बरगदिया, ढक्का कॉलोनी, शारदापार के सिंघाड़ा उर्फ टाटरगंज, बमनपुर भागीरथ, बैल्हा, सिद्धनगर, शास्त्रीनगर, भरतपुर, मोरनिया गांधीनगर, चंद्रनगर, रामनगर, अशोकनगर, श्रीनगर, आजाद नगर, कबीरगंज, गौतमनगर, कुठिया गुदिया, विजय नगर, नहरोसा, राणा प्रतापनगर, हजारा शामिल हैं।
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बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए शरणालय और बाढ़ चौकियां बनाई जाती हैं। राशन कोटे की दुकानों पर पर्याप्त खाद्यान्न रहता है। अब सामग्री वितरण का अनुबंध भी हो चुका है। अगर समस्या होगी तो पीड़ितों को राशन सामग्री की किट दी जाएगी। - विजय त्रिवेदी, तहसीलदार।
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