पीटीआर में बना वाटर होल। स्रोत विभाग
- फोटो : मुसाफिरखाना में बिजली तार पर टूटकर गिरी पेड़ की डाल।
एक-एक लाख की लागत से तैयार किए जा रहे पांच नए जलस्रोत, संख्या बढ़कर होगी 60
पीलीभीत। बढ़ते तापमान और आगामी गर्मी के मद्देनजर पीलीभीत टाइगर रिजर्व प्रशासन ने वन्यजीवों को पेयजल संकट से बचाने के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। इसके तहत विभिन्न रेंजों में पांच नए वाटर स्रोतों का निर्माण शुरू कराया गया है ताकि वन्यजीवों को पर्याप्त पानी मिल सके।
पीटीआर में प्राकृतिक रूप से नदियां, नाले और वेटलैंड मौजूद हैं, फिर भी भीषण गर्मी के दौरान कई स्थानों पर जलस्तर कम हो जाता है। इसी को देखते हुए टाइगर रिजर्व प्रशासन ने इस वर्ष पहले से तैयारी शुरू कर दी है। वर्तमान में रिजर्व की पांचों रेंजों में 55 से अधिक वाटर स्रोत मौजूद हैं। इनमें से करीब 26 जलाशयों में सोलर पंप के माध्यम से पानी भरा जाता है, जबकि अन्य प्राकृतिक स्रोतों पर निर्भर हैं। जरूरत पड़ने पर इनमें टैंकरों के जरिए भी पानी पहुंचाया जाता रहा है। बीते वर्ष एमओयू के तहत एमथ्रीएम फाउंडेशन द्वारा तीन सोलर पंप उपलब्ध कराए जाने के बाद सोलर पंप से रिचार्ज होने वाले वाटर स्रोतों की संख्या बढ़कर 29 हो गई थी। अब नए सत्र में पांच और वाटर स्रोत बनाने का निर्णय लिया गया है।
प्रत्येक वाटर होल पर करीब एक लाख रुपये की लागत आएगी। इसके लिए उपयुक्त स्थानों का चयन कर निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया है। इन पांच नए जलस्रोतों के तैयार होने के बाद टाइगर रिजर्व में वाटर होल की कुल संख्या बढ़कर 60 हो जाएगी। इससे बाघ, हिरण सहित अन्य वन्यजीवों को पानी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा और वे जंगल के भीतर ही सुरक्षित रह सकेंगे।
डीएफओ मनीष सिंह ने बताया कि वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर प्रयास किए जा रहे हैं। संरक्षित क्षेत्रों को प्राकृतिवास एवं वन्यजीव प्रबंधन योजना के अंतर्गत पांच नए वाटर स्रोतों का निर्माण शुरू कराया गया है, जिन्हें जल्द पूरा कर लिया जाएगा। संवाद