पीलीभीत। बरखेड़ा से भरा पचपेड़ा की गोशाला भेजे गए गोवंशीय पशुओं की मौत के मामले में दोषी अफसरों पर कार्रवाई की गई है। पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण न कराने और गोशाला भेजते वक्त नियमों का पालन न करने पर नगर पंचायत बरखेड़ा के अधिशासी अधिकारी (ईओ) और पशु चिकित्साधिकारी पर पशु क्रूरता अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कराई गई है।
अमरिया तहसील क्षेत्र के भरा पचपेड़ा गोशाला के पास मंगलवार को गोवंशीय पशुओं के शव पड़े मिले थे। अमर उजाला में 13 मई को खबर प्रकाशित कर यह मामला उठाया गया था। इसके बाद मामले की जांच के आदेश हुए थे। डीएम वैभव श्रीवास्तव ने एडीएम न्यायिक देवेंद्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम भेजकर मामले की जांच कराई। तीसरे दिन बृहस्पतिवार को मामले में प्रभारी मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अखिलेश ने बरखेड़ा थाने में ईओ राकेश कुमार चौबे और पशु चिकित्साधिकारी के खिलाफ तहरीर दी। इसमें बताया कि सात मई से दो ट्रकों में लादकर 40 गोवंशीय पशु नगर पंचायत बरखेड़ा के ईओ और पशु चिकित्साधिकारी डॉ. वीरपाल सिंह द्वारा भरा पचपेड़ा की गोशाला भेजे गए थे। पशुओं को उतारते वक्त गोशाला के प्रबंधक रंजीत सिंह ने कर्मचारियों को चार पशुओं के मृत निकलने की बात बता दी थी। उन्होंने यह भी कहा था कि कई अन्य पशुओं की हालत नाजुक है। आठ मई को सात और नौ मई को आठ गोवंशीय पशुओं की मौत हो गई। इनके शव कैलाश नदी किनारे खेत के गड्डों में डाल दिए गए थे। यह भी सामने आया है कि पशुओं को ट्रक में लादते वक्त घोर लापरवाही बरती गई। न तो पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया, न ही नियमानुसार वाहन में उन्हें ले जाया गया। नियमानुसार एक ट्रक में छह पशु लादने चाहिए थे, जबकि ट्रक में तीन गुना पशु लाद दिए गए। इसकी अधिकारियों से कोई स्वीकृति भी नहीं ली गई। किसी तरह की सूचना भी आला अधिकारियों को नहीं दी गई। दोनों अधिकारियों की घोर लापरवाही सामने आई। इंस्पेक्टर उमेश सिंह सोलंकी ने तहरीर मिलने के बाद दोनों को नामजद करते हुए रिपोर्ट दर्ज कर ली।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी की तहरीर पर नगर पंचायत बरखेड़ा के अधिशासी अधिकारी और पशु चिकित्साधिकारी पर पशु क्रूरता अधिनियम की धारा 11(1) घ और 38 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। मामले की गहनता से विवेचना कराकर तथ्यों के आधार पर दोषियों पर कार्रवाई कराई जाएगी। - रोहित मिश्र, एएसपी