पूरनपुर। बाढ़-कटान में 61 किसानों की जमीनें और 350 किसानों की फसलें शारदा नदी में समा गईं थीं। 200 ग्रामीणों के छप्परपोश घर ढह गए। अधिकांश किसानों को चार हजार रुपये प्रति घर के हिसाब से मुआवजा मिल गया, लेकिन नदी में समाई जमीन के बदले अब तक मात्र पांच किसानों को ही जमीन का पट्टा दिया गया है। नदी में समाई फसलों का मुआवजा अब तक नहीं मिला है। मुआवजा और जमीन का पट्टा न मिलने से बाढ़ पीड़ितों की दिवाली इस बार फीकी रहेगी।
शारदा नदी दशकों से क्षेत्र में तबाही मचा रही है। हर साल बाढ़-कटान से बचाव के लिए करोड़ों रुपये भी ठिकाने लगाए जाते हैं। नदी किनारे के गांव चंदिया हजारा, राहुलनगर सहित कई अन्य गांवों को बचाने के लिए नौ करोड़ रुपये की लागत से नदी का चेनलाइजेशन भी शुरू कराया गया। इतनी ही धनराशि से तटबंध भी बनाया गया।
चेनलाइजेशन का कार्य अभी अधूरा है। बनाया गया तटबंध पहली बाढ़ ही नहीं झेल पाया और कई स्थानों से क्षतिग्रस्त हो गया। नतीजा यह हुआ कि चंदिया हजारा ग्राम पंचायत के 61 किसानों को वर्ष 1974 में पुनर्वासन योजना के तहत मिली जमीन नदी में समा गई।
चंदिया हजारा ग्राम पंचायत में 415 किसान हैं। करीब 350 किसानों की फसलें नदी में समा गई। 200 लोगों के छप्परपोश घर ढह गए। घर ढहने पर अधिकांश पीड़ितों को चार हजार रुपये प्रति परिवार के हिसाब से मुआवजा मिल गया, लेकिन जमीन और फसलें नदी में समाने पर अब तक मुआवजा नहीं मिल सका। वजह पीड़ितों को दी गई जमीन उनके नाम सरकारी अभिलेखों में दर्ज न होना बताया गया।
मजदूरी के लिए तेलांगना और आंध्र प्रदेश जाने की तैयारी कर रहे कई परिवार
गांव के कई लोग दिवाली के बाद मजदूरी के लिए तेलांगना और आंध्र प्रदेश जाने की तैयारी में लगे हैं। दूसरे प्रदेशों में मेहनत मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करने की बात ग्रामीण कह रहे हैं।
शारदा की बाढ़ में गन्ना, हल्दी, आलू आदि फसलें नदी की भेंट चढ़ गईं। यहां मजदूरी भी नहीं मिल रही। दीपावली मनाने की बात तो दूर, परिवार पालने में दिक्कत हो रही है। - प्रदीप मलिक
खेत में तीन एकड़ गन्ना की फसल बोई थी। लहलहा रही फसल देखकर परिजन कई अरमान पूरे होने का सपना संजोए थे। बाढ़ की तबाही ने अरमानों पर तो पानी फेर ही दिया। अब दो जून की रोटी के लिए मजदूरी ढूंढनी पड़ रही है। - विश्वजीत मिस्त्री
शारदा नदी के किनारे की जमीन को पसीना बहाकर उपजाऊ बनाया था। शारदा नदी की बाढ़ में फसलें डूबकर खराब हो गईं। अब तक खेतों में पानी भरा है। आर्थिक संकट के चलते रात को नींद नहीं आ रही है। नेता और अफसर तक सुध नहीं ले रहे हैं। - ठाकुरदास
शारदा नदी का फाइल फोटो।
शारदा नदी का फाइल फोटो।
शारदा नदी का फाइल फोटो।