गन्ना मूल्य भुगतान बकाया होने के चलते जिले का किसान आर्थिक तंगी से जूझने लगा है। करीब दो लाख किसानों का एक अरब से अधिक रुपया विभिन्न चीनी मिलों पर बाकी है। जिले में स्थापित दो निजी और दो सहकारी चीनी मिलों की ही अगर बात करें तो मात्र पीलीभीत स्थित ललित हरि चीनी मिल को छोड़ शेष तीनों चीनी मिलों पर ही 66ण्17 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य भुगतान बकाया है। इसमे से निजी क्षेत्र की बरखेड़ा चीनी मिल पर किसानों के बकाया गन्ना मूल्य भुगतान के लिए प्रशासनिक अधिकारियों ने एक दो बार दबाव भी बनायाए लेकिन पूरनपुर और बीसलपुर स्थिति सहकारी मिलों पर बकाया 29ण्80 करोड़ रुपये किसानों को दिलाने के लिए प्रशासन और शासन से अब तक कोई प्रयास नहीं किए गए। यह हाल तब है जब सहकारी मिलों की डीएम खुद अध्यक्ष हैं। इससे भी खास बात यह है कि विधान सभा चुनाव में भाजपा ने प्रदेश में सरकार बनने के बाद से 15 दिन के भीतर गन्ना मूल्य भुगतान का वादा किया थाए लेकिन हकीकत यह है कि फरवरी और मार्च में गन्ना आपूर्ति करने वाले किसानों तक की धनराशि मिलों पर बकाया है। जिसके चलते किसान आर्थिक तंगी से गुजर रहा है। अगली फसल के लिए अथवा अन्य जरूरत के लिए उसे सेठ साहूकारों अथवा बैंक से कर्ज लेना पड़ रहा है। सत्ता पक्ष से जुड़े नेता और मंत्री तो किसानों की इस दुर्दशा पर चुप्पी साधे ही हैंए प्रमुख विपक्षी दल भी किसानों की इस समस्या को लेकर आवाज बुलंद करने की जहमत नहीं उठा रहे हैं।
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मिलों की कुंडली पर एक नजर में
बीसलपुर स्थित किसान सहकारी चीनी मिल पर पिछले वर्ष का साढ़े सत्रह हजार किसानों का 11ण्68 करोड़ रुपये अभी भी बाकी है। 14 अप्रैल 2017 तक इस मिल ने गन्ने की पेराई की थी। 27 मार्च तक खरीदे गए गन्ने का भुगतान ही कर सकी है। उसके बाद किसानों से खरीदे गए गन्ने की उपरोक्त धनराशि बकाया है। मिल के जीएम सुरेश चंद्रा कहते हैं कि शासन से पैसे मांगे गए हैं। जब मिलेगा तब भुगतान कर दिया जाएगा।
पूरनपुर स्थित सहकारी चीनी मिल पर किसानों का 18ण्17 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य भुगतान बकाया है। 28 मार्च तक इस चीनी मिल ने किसानों से गन्ना खरीदा। भुगतान के मामले में इसकी स्थिति बीसलपुर से बुरी है। यह 21 फरवरी 2017 तक किसानों से खरीदे गन्ने का ही भुगतान कर सकी है। उसके बाद खरीदे गन्ने का उपरोक्त भुगतान बाकी है।
बरखेड़ा स्थित बजाज शुगर मिल ने पेराई सत्र का शुभारंभ सात नवंबर 2016 को किया था। 71ण्12 लाख क्विंटल गन्ना पेरने के बाद पांच मार्च 2017 को मिल ने पेराई सत्र खत्म किया। यह मिल मात्र तीन फरवरी तक किसानों से खरीदे गन्ने का ही भुगतान कर सकी है।
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संपूर्णानगर सहकारी मिल पर भी 48 करोड़ बाकी
जिले की इन मिलों के अलावा खीरी के संपूर्णानगर स्थित किसान सहकारी चीनी मिल पर भी किसानों का करीब 48 करोड़ रुपये बाकी है। 21 नवंबर 2016 को इस मिल ने अपने पेराई सत्र का शुभारंभ किया था और 14 अप्रैल तक चली थी। इस मिल ने भी 14 मार्च तक खरीदे गन्ना मूल्य भुगतान के बाद से किसानों को कोई भुगतान नहीं किया। बकाया गन्ना मूल्य भुगतान को लेकर खुदकुशी करने वाला नेहरू नगर का किसान निरंजन सिंह का भी इस मिल पर बकाया है।
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किसानों की व्यथा
धान रोपाई का कार्य हुआ लेट
बीसलपुर क्षेत्र के गंाव गोवल पतीपुरा निवासी धर्मपाल ने बताया कि उनका चीनी मिल पर तीन गन्ना पर्चियों का 50 हजार रुपये से अधिक बकाया है। बकाया भुगतान न मिलने के कारण उनकी धान की रोपाई का कार्य एक पखवाड़ा लेट हो गया। देर से फसल बोने के कारण उसका असर उत्पादकता पर पड़ा है।
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उधार लेकर की पुत्री की शादी
पूरनपुर क्षेत्र के गांव नौरंगाबाद निवासी किसान मुरलीधर ने चार एकड़ भूमि में से डेढ़ एकड़ भूमि पर गन्ना की फसल की थी। किसान ने बताया कि उसके चार पुत्री और तीन पुत्र हैं। गन्ना मूल्य का भुगतान न होने से इस बार उसे आर्थिक तंगी झेलनी पड़ी। घर बनवाने के बाद पुत्री शकुंतला की शादी की। पुत्री की शादी को उसे ब्याज पर उधार रुपये लेना पड़ा।
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विपक्ष के बोल
भाजपा ने झूठ बोल प्रदेश व देश में बहुमत हासिल किया है। भाजपा कभी किसानों की हितैषी नहीं रही। उनके पास किसानों की बेहतरी के लिए कोई योजना भी नहीं है। इस सरकार को देश व प्रदेश की गद्दी से उतारने के लिए नौ अगस्त को आंदोलन के माध्यम से किसानों की बात की जाएगी। भाजपा सरकार का असली चेहरा लोगों के सामने आ चुका है। जनता उसे खुद जवाब दे देगी।
हेमराज वर्माए पूर्व मंत्री सपा
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सत्ता के बोल
प्रदेश में 116 चीनी मिलें हैं जिनमे से 65 चीनी मिलों ने शत प्रतिशत भुगतान हो गया है। कुल गन्ना मूल्य 25386 करोड़ बकाया था। 23102 करोड़ भुगतान करा दिया गया। मात्र 2284 करोड़ रुपये किसानों का मिल पर बाकी है। पिछली सरकारों ने वित्तीय स्थिति काफी खराब कर रखी थी। बजट सत्र में इसका प्रावधान किया गया है। जल्द ही बकाया भुगतान भी हो जाएगा। अगले सत्र से किसानों को 14 दिन बाद भुगतान मिलने लगेगा।
रामसरन वर्माए भाजपा विधायक
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