गांव बबूरा स्थित एक राइस मिलर के धर्मकांटे पर किसानों ने खुद घटतौली
पकड़ी। जिस पर किसानों ने जमकर हंगामा किया और मिल मालिक के खिलाफ प्रदर्शन
कर नारेबाजी की। पुलिस ने धर्मकांटे पर तैनात कर्मचारी और मिल के मुनीम को
हिरासत में ले लिया है।
गांव नवदिया पगार निवासी संतराम ने बताया कि
उन्होेंने अपना खेत गांव तिलसंडा निवासी चरन सिंह को बटाई पर दे रखा है।
रविवार को वह चरन सिंह के साथ ट्रॉली में गेहूं भरकर गांव बबूरा स्थित एक
राइस मिल पर बिक्री करने पहुंचा। मिलर के मुनीम ने अपने ही धर्मकांटे पर
वजन कराया।
जिसमें ट्रॉली का वजन कम करने के बाद गेहूं 36.60 क्विंटल
निकला। जबकि ट्राली गेहूं से भरी हुई थी। शक होने पर किसानों ने छोटे कांटे
से 60 किलो की कट्टे में भर्ती कराकर वजन कराया जो 47.52 क्विंटल हुआ।
दोबारा कराई गई तोल में 10.92 क्विंटल का फर्क निकला। इससे किसान आक्रोषित
हो गए और मुनीम से घटतौली लिखवाकर ले लिया। इस दौरान गुस्साए किसानों ने
जमकर हंगामा कर प्रदर्शन और नारेबाजी की।
सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुंच
गई। पुलिस ने धर्मकांटे पर तैनात कर्मचारी व मुनीम को हिरासत में लिया है।
किसान संतराम ने मिलर समेत तीन के खिलाफ पुलिस को तहरीर दी है, लेकिन पुलिस
ने अभी रिपोर्ट दर्ज नहीं की। उधर मिलर के मुनीम रमेश चंद्र का कहना है कि
इंट्री करने मेें चूक हुई है। धर्मकांटे में कोई गड़बड़ी नहीं है। एसओ
राजेश ने बताया कि मामले की जांच के बाद रिपोर्ट दर्ज की जाएगी।
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मिलर
के धर्मकांटे में इतना बड़ा अंतर निकलेगा कभी सोचा भी नहीं था। अब तक पता
नहीं कितने किसान घटतौली का शिकार हो चुके हैं। आगे से कोई किसान इस तरह
घटतौली का शिकार न हो इसके लिए कार्रवाई होनी चाहिए।
चरन सिंह फार्मर तिलसंडा
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ओलावृष्टि
व बारिश से फसल पहले ही नष्ट हो चुकी है। जो बची है उसका भी बाजार में
वाजिब दाम नहीं मिल रहा है। ऐसे में धर्मकांटे पर घटतौली का शिकार कोई
किसान हो उसे कैसे बर्दाश्त किया जा सकता है।
संतराम कृषक नवदिया पगार
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जिस
धर्मकांटे पर किसानों के गेहूं की घटतौली का मामला पकड़ा गया है उसके
खिलाफ कार्रवाई होगी। किसानों का शोषण नहीं होने दिया जाएगा और सभी
धर्मकांटों की औचक चेकिंग भी कराई जाएगी।
एपी श्रीवास्तव, एसडीएम बीसलपुर
अधिकांश मिलर ने लगा रखे हैं निजी धर्मकांटे
बिलसंडा।
नगर के अधिकांश राइस मिलर ने मिल कैंपस में ही निजी धर्मकांटे लगा रखे
हैं। जो कृषकों से गेहूं खरीदते हैं और उसका वजन अपने ही धर्मकांटे से
कराते हैं। अगर कोई कृषक दूसरे धर्मकांटे से वजन कराकर लाता है, तो उसे
मिलर नहीं मानते हैं। आखिर ऐसा क्यों है? जाहिर है कि कहीं न कहीं गड़बड़ी
है। ऐसा नहीं है कि इससे पहले घटतौली के मामले उजागर नहीं हुए। लेकिन पकड़े
जाने पर व्यापारी चुपचाप समझौता कर लेते हैं। ताकि उनकी करतूत जग जाहिर न
हो पाए। मिलर के अलावा नगर में दो और भी धर्मकांटे हैं, लेकिन गल्ला से
जुडे़ व्यवसायी इन धर्मकांटों से वजन नहीं कराते हैं।