एमकेएस इंटरटेनमेंट की ओर से रविवार को रुहेलखंड मैराथन दौड़ का आयोजन किया गया। आयोजकों ने बड़े-बड़े दावे किए। कहा कि रामजेठमलानी, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा कई सेलीब्रेटी, खिलाड़ी व सेना के अधिकारी पहुंचेंगे, लेकिन कोई नहीं पहुंचा। दौड़ में प्रतिभाग करने को सुबह से ही सेना, एसएसबी व स्पोर्ट्स कॉलेज के कुछ जवान एवं बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे पहुंचे थे।
स्टेडियम में धावकों की संख्या और वर्ग के हिसाब से कोई व्यवस्था न होने से अफरा तफरी मची रही। इस बीच आयोजकों ने पूर्व मंत्री अनीस अहमद उर्फ फूलबाबू से झंडी दिखाकर सीनियर वर्ग की टीम को शहर में दौड़ने के लिए रवाना कर दिया। वहीं जूनियर वर्ग के धावकों को स्टेडियम में ही दौड़ाया गया। स्टेडियम में बच्चों की दौड़ पूरी भी नहीं हो पाई थी 23 मिनट में शहर की दौड़ पूरी कर सीनियर धावक पहुंचने लगे जिससे व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई।
ऐसे में विजेताओं के चयन को लेकर सवाल उठने लगे और अभिभावकों व धावकों ने हंगामा शुरू कर दिया। लोगों का गुस्सा बढ़ने की जानकारी पर एएसपी सुधीर कुमार सिंह स्टेडियम पहुंचे और उन्होंने खुद माइक संभाल सभी को समझा बुझाकर शांत कराया। उनके निर्देश के बाद आयोजकों ने सीनियर वर्ग के तीन खिलाड़ियों क्रमश: स्पोर्ट्स स्टेडियम लखनऊ के छोटेलाल पटेल, सेना के जवान शहर निवासी रघुवीर कुमार और स्पोर्ट्स स्टेडियम लखनऊ के विकास मौर्य को क्रमश: प्रथम, द्वितीय व तृतीय घोषित किया।
यहां पूर्व विधायक एवं किसान नेता वीएम सिंह, रिटायर्ड ब्रिगेडियर जीएस बिंद्रा, एसपीएस संधू, डॉ. प्रणव शास्त्री, अश्वनी अग्निहोत्री, राजीव कुमार, पवन सिन्हा, नितिन कौशिक सहित कई लोग मौजूद रहे।
व्यवस्था नहीं थी तो क्यों कराई दौड़
आयोजकों ने बड़े पैमाने पर दौड़ कराने की घोषणा कर लोगों से एंट्री तो ले ली लेकिन कोई प्लान तैयार नहीं किया, जिससे अव्यवस्था फैल गई।
- पीएल शर्मा, सीआरपीएफ झारखंड
मैं दौड़ी फिर भी बाहर कर दिया
स्टेडियम में बच्चों के साथ मैं भी दौड़ी और आठ चक्कर भी लगा लिए। लेकिन बाद में अचानक सभी बच्चों के साथ मुझे ट्रैक से हटा दिया गया।
- एकता सक्सेना, छात्रा
स्टेडियम में मैराथन का मतलब क्या है?
मैराथन दौड़ लोगों में देश प्रेम का जज्बा पैदा करने के लिए होती है। जिसका आयोजन मुख्य मार्गों पर होता है न कि स्टेडियम में। लोगों के साथ धोखा किया गया है।
- वेदकमल, सरकारी कर्मचारी
सिर्फ पैसे वसूलने का खेल
दौड़ के लिए सभी से इंट्री फीस ली गई लेकिन उस हिसाब से व्यवस्थाएं नहीं की गई। यह तो अच्छा हुआ कोई बाहर से बड़ा अधिकारी या खिलाड़ी नहीं आया वरना पीलीभीत का नाम और बदनाम होता।
- सुधांशू सिंह, नई बस्ती
सोच अच्छी थी लेकिन व्यवस्थाएं नहीं
शहर में मैराथन की दौड़ एक अच्छी सोच थी। इससे लोगों में देश और समाज के प्रति प्रेमभाव जागृत होता है। चूंकि पहली बार इतना बड़ा कार्यक्रम था जिससे अव्यवस्थाएं हो गईं। लोगों को दौड़ का मतलब समझना चाहिए।
- जीएस बिंद्रा, रिटायर्ड ब्रिगेडियर
प्रतिभागियों ने घेरा डीएम आवास
सिर्फ तीन के नाम की घोषणा कर उन्हें पुरस्कृत किए जाने से प्रतिभागियों में काफी नाराजगी थी। पहले उन्होंने सुनगढ़ी थाने पहुंचकर विरोध जताया और बाद में डीएम आवास पहुंचकर हंगामा किया। उनका कहना था कि उन्हें कम से कम प्रमाण-पत्र को मिलना ही चाहिए था। सूचना पर पहुंचे सीओ सिटी, कोतवाल व सुनगढ़ी इंस्पेक्टर ने प्रतिभागियों को समझाकर शांत कराया।
शहर में एक बेहतर आयोजन का प्रयास किया था लेकिन कुछ लोगों ने अव्यवस्थाएं फैला दीं, जिससे समस्या आ गई। निर्णय सही हुए हैं। स्कूल से प्रतिभाग करने वाले सभी प्रतियोगियों के प्रमाण-पत्र स्कूलों में भेजे जा रहे हैं।
- राज खान, आयोजक