गेहूं खरीद किसानों से न होने के मुद्दे पर किसान नेता वीएम सिंह 13 अप्रैल 2009 को कलक्ट्रेट की ओर बढ़ रहे थे। पुलिस ने धारा 144 लागू होने का हवाला देकर उन्हें रोका लेकिन वह रुके नहीं। इस पर निषेधाज्ञा के उल्लंघन और सरकारी संपत्ति को क्षति पहुंचाने की रिपोर्ट दर्ज की गई थी।
पीलीभीत में सरकारी संपत्ति को क्षति पहुंचाने के आरोप में नामजद 13 वर्ष पुराने मामले में किसान नेता वीएम सिंह अपने साथियों समेत अदालत से बरी हो गए। उन्हें सोमवार को सिविल जज सीनियर डिवीजन/अपर मुख्य न्यायिक अधिकारी प्रियंका रानी की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दोष मुक्त करार दिया।
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गेहूं खरीद किसानों से न होने के मुद्दे पर किसान नेता वीएम सिंह 13 अप्रैल 2009 को कलक्ट्रेट की ओर बढ़ रहे थे। पुलिस ने धारा 144 लागू होने का हवाला देकर उन्हें रोका लेकिन वह रुके नहीं। इस पर निषेधाज्ञा के उल्लंघन और सरकारी संपत्ति को क्षति पहुंचाने की रिपोर्ट दर्ज की गई। किसान नेता वीएम सिंह के साथ गयासुद्दीन, सुधीर तिवारी, प्रशांत कुमार, हरप्रीत सिंह, हरजिंदर सिंह को नामजद किया गया।
पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। सुनवाई के दौरान आरोपियों ने खुद को निर्दोष बताया। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों को सुनने एवं पत्रावली का पूर्ण अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने सभी आरोपियों को दोषमुक्त किया।