तेल में खेल पर अकुश लगाने के लिए चल रहे अभियान में अभी तक किसी पंप पर चिप तो नहीं मिली है अलबत्ता अधिकांश पेट्रोलपंपों पर घटतौली मिल रही है। ऐसे में सवाल उठता कि अब हर माह बाट माप और ऑयल कंपनी के अधिकारी पेट्रोलपंपों की जांच कर रिपोर्ट देते हैं तो फिर गड़बड़ी कैसे हो रही है। क्या इस घटतौली के लिए सिर्फ पंप मालिक जिम्मेदार हैं। फिलिंग स्टेशन का लाइसेंस मिलने पर पेट्रोल पंप संचालक को सिर्फ तेल बेचने का अधिकार होता है। पंप का स्वामित्व ऑयल कंपनियों का रहता है साथ ही भंडारण की जिम्मेदारी भी ऑयल कंपनियों की है। वहीं दूसरी ओर बाट माप विभाग के अधिकारी ऑयल कंपनी के अधिकारियों के साथ प्रति माह पेट्रोल पंपो की जांच कर रिपोर्ट देती हैं। साथ ही ऑयल कंपनी की ओर से एक जिला सेल्स अफसर तैनात किया जाता है जिसकी जिम्मेदारी जिले भर के पेट्रोलपंपों की नियमित जांच करना एवं मासिक रिपोर्ट देना। इस रिपोर्ट में डीजल पेट्रोल की गुणवत्ता के साथ मात्रा की भी जांच की जाती है। ऐसे में सवाल उठता है जब हर माह मशीनों एवं उसमें लगी सील की जांच की जाती है। सही मात्रा और गुणवत्ता की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जाती है तो घटतौली कैसे मिल रही है।
मिलीभगत से चल रहा धंध
जिले में कुल 88 पेट्रोलपंप हैं। तीन मई से चल रही जांच में अब तक 16 पंप चेक किए जा चुके है जिसमें आठ को गड़बड़ी मिलने पर सीज किया गया है। इन आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि जिले के अधिकांश पेट्रोलपंपों में गड़बड़ी है। यदि यह गड़बड़ी एक दो पेट्रोल पंप या उनकी एक दो मशीनों में मिलती तो कहा जा सकता था कि चोरी छिपे गड़बड़ी हो रही है होगी लेकिन 50 प्रतिशत पेट्रोलपंपों में मिल रही घटतौली मिलीभगत की ओर इशारा कर रहे हैं।
बाट माप विभाग व ऑयल कंपनियों को नियमित जांच कर रिपोर्ट देनी होती है। रिपोर्ट भेजी भी जाती है। इसके बाद भी गड़बड़ी मिलना बड़ा सवाल है। प्रतिदिन की रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है। शासन स्तर से ही इसमें कोई निर्णय लिया जाएगा। - रमन मिश्रा, जिला पूर्ति अधिकारी