गांव मीरपुर हीरपुर में हुए दोहरे हत्याकांड के बाद ग्रामीण आज दूसरे दिन भी भी खौफजदा हैं। हत्यारोपियों ने जिस अंदाज में चाचा-भतीजे की धारदार हथियार से काटकर हत्या की। उसे याद कर ग्रामीण कांप उठते हैं। दूसरे दिन भी गांव में अधिकांश लोगों के घरों में चूल्हा नहीं जला। गांव की गलियों से रौनक भी गायब रही। वहीं चारों ओर शनिवार को भी सन्नाटा पसरा रहा। यूं तो मीरपुर हीरपुर एक ही गांव का नाम है, लेकिन दोनों की आबादी के बीच करीब आधा किलोमीटर का फासला है। हीरपुर में करीब 300 लोग जाटव बिरादरी और 100 लोग पासी जाति के हैं। गुरुवार की रात छेड़छाड़ की रंजिश में गांव के पूर्व प्रधान नेवाराम, उनके बेटे राजू और भाई ओमकार पर हमलावरों ने धारदार हथियार से हमला कर दिया था। जिसमें राजू और ओमकार की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि पूर्व प्रधान घायल हो गए थे। घटना के बाद गांव में सन्नाटा पसर गया था। बेटे राजू और भाई ओमप्रकाश की हमलावरों ने जिस तरह खाद कर हत्या की थी। उसे याद कर गांव के लोग आज भी कांप उठते हैं। गांव में दूसरे दिन भी सन्नाटा पसरा रहा। कई लोगों के घरों के चूल्हे नहीं जले।
चाचा-भतीजे की एक साथ निकली शवयात्रा
बिलसंडा। दोहरे हत्याकांड में मारे गए ओमकार और राजू का शव पोस्टमार्टम के बाद शुक्रवार की देर शाम जब गांव पहुंची तो घर में कोहराम मच गया। पुलिस की मौजूदगी में शनिवार की सुबह दोनों शवों का गांव के ही शमशान घाट में अंतिम संस्कार कर दिया गया। दोनों शवों की अर्थियां एक साथ घर से निकलीं। गांव के समीप स्थित श्मशान घाट पर दोनों की अलग-अलग चिताएं बनाईं गईं थी। मृतक ओमकार के शव को उसके पुत्र धर्मपाल और नेवाराम के पुत्र राजू के शव को उसके छोटे भाई विजेन्द्र ने मुखाग्नि दी। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस बल तैनात रहा।
चौथा हत्यारोपी भी दबोचा
बिलसंडा। गांव मीरपुर हीरपुर में हुए दोहरे हत्याकांड में पुलिस गांव के ही तीन सगे भाइयों वीरपाल, अमरपाल, सत्यपाल, गोपाली और अर्जित के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। पुलिस ने घटना के दूसरे दिन तीन सगे भाइयों को गिरफ्तार कर लिया था। जबकि अर्जित और गोपाली फरार थे। एसओ राजेश यादव ने बताया कि चौथे हत्यारोपी अर्जित को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। अब तक गिरफ्तार चारों आरोपियों का पुलिस ने शनिवार को चालान कर दिया। फरार आरोपी गोपाली को पुलिस तलाश रही है।
नेवाराम और भूपेंद्र नहीं हो सके अंत्येष्टि में शामिल
बिलसंडा। छेड़छाड़ के आरोप में सुधार गृह में बंद भूपेंद्र अपने चाचा और भाई के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सका। हालांकि घरवालों ने पैरोल पर लाने की कोशिश की, लेकिन अवकाश होने की वजह से सफलता नहीं मिल पाई। अस्पताल में भर्ती होने के कारण पूर्व प्रधान भी पुत्र और भाई के अंतिम दर्शन नहीं कर सके।