यह लिखा सुसाइड नोट में
पांच पन्नों के सुसाइड नोट में उपेंद्र ने नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी शमशेर सिंह पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि बहाली और गबन प्रकरण से राहत दिलाने के नाम पर उनसे लाखों रुपये लिए गए, लेकिन उसे न्याय नहीं मिला। सुसाइड नोट के अनुसार, वर्ष 2025 में बर्खास्तगी के बाद उपेंद्र अपनी नौकरी बचाने के लिए लगातार प्रयास करते रहे। पत्नी के नाम शाहजहांपुर के तिलहर स्थित जमीन को दो भागों में बेचकर 41,90,000 रुपये मिले थे।
इसके बाद उन्होंने 29 सितंबर 2025 को छह लाख रुपये और 17 लाख रुपये छह अक्तूबर 2025 को नगर पालिका परिषद के खाता संख्या में जमा किए। इसके बावजूद उन्हें जेल भेज दिया गया। जेल से छूटने के बाद वह ईओ शमशेर सिंह से मिले और जबरन रुपये जमा कराने के बाद भी जेल भेजने की बात कही। पत्र में आगे लिखा गया कि इस पर ईओ ने नौकरी करने के नाम पर 20 लाख रुपये की मांग रखी। न देने पर नौकरी से हटाने और दूसरे केस में फिर जेल भेजने की चेतावनी दी। दोबारा जेल जाने के डर से उन्होंने रुपये का इंतजाम करने के लिए मां और पत्नी के गहने गिरवी रखे। साथ ही लोन लेकर कुल 19 लाख रुपये दो चेक के माध्यम ईओ को दिए।
'आठ लाख और दो, एडीएम और पालिकाध्यक्ष प्रतिनिधि को देना है'
सुसाइड नोट में लिखा गया कि इसके बाद ईओ ने एडीएम (पूर्व) और नगर पालिका चेयरमैन प्रतिनिधि अमन जायसवाल उर्फ निक्की को देने के लिए आठ लाख रुपये और देने को कहा। इसके बाद ही नौकरी लगने और कोर्ट में उनके पक्ष में बयान देने की ईओ ने बात कही। इस दौरान कोर्ट में कई तारीख पड़ने के बाद न तो ईओ पहुंचे न ही उनका कोई अधिवक्ता आया। इस पर उन्होंने ईओ से अपने रुपये वापस मांगे तो गालीगलौज करते हुए चेयरमैन प्रतिनिधि को अपना बताकर कुछ नहीं कर पाने की धमकी दी। कहा कि चेयरमैन प्रतिनिधि को भी हिस्सा देना होता है।
2004 से 2025 तक हर साल हुए ऑडिट, नहीं मिला गबन
सुसाइट नोट के चौथे पन्ने में लिखा गया कि वर्ष 2004 से 2025 तक हर साल ऑडिट होता है, लेकिन वह कभी गबन की कोई शिकायत में नहीं फंसे। ईओ पर आरोप लगाकर नौकरी से निकालने का जिक्र किया गया। रुपये देने के बाद एक नोटिस भेजकर गबन की शेष रकम जमा न करने पर आरसी जारी होने की बात कही। जिंदगी से परेशान होकर आत्महत्या करने पर मजबूर होने की बात कही। जिसके जिम्मेदार ईओ शमशेर सिंह और बाबू अकरम होंगे।
'विधायक जी हमारी आत्महत्या के प्रकरण को प्रमुखता से उठाना'
सुसाइड नोट के अंत में लिखा गया कि विधायक और मुख्यमंत्री से शिकायत करने के साथ ईओ शमशेर सिंह तुम्हारा क्या होगा, यह भगवान जाने। विधायक जी से अनुरोध है कि मेरी आत्महत्या के प्रकरण को प्रमुखता से उठाएं, क्योंकि ईओ कह रहे हैं कि भाजपा सरकार में हमारा कोई कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता।
ईओ के खिलाफ भी केस दर्ज करने की मांग
सुसाइड नोट में अधिशासी अधिकारी को आत्महत्या के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए उनके विरुद्ध कार्रवाई करने का आग्रह किया है। बीसलपुर के मुहल्ला दुर्गा प्रसाद निवासी उपेंद्र शंखधर ने सोमवार को शाम 5:30 बजे कमरे में रस्सी से छत के कुंड में फंदा लगा लिया। परिजनों ने बताया उपेंद्र को मृतक आश्रित के तहत नौकरी मिली थी।
एसपी सुकीर्ति माधव ने कहा कि जो सुसाइड नोट मिला है। उसकी जांच हो रही है। मृतक के परिजनों की तरफ से जो भी शिकायत की जाएगी। उस आधार व जांच में जो तथ्य सामने आएंगे। उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
डीएम ज्ञानेंद्र सिंह ने कहा कि बीसलपुर नगर पालिका के बर्खास्त पालिका कर्मी के सुसाइड मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम का गठन किया जा रहा है। जांच में जो भी बातें सामने आएंगी। उस आधार पर कार्रवाई होगी। फिलहाल पुलिस के स्तर से आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
ईओ ने स्वयं को बताया निर्दोष
सुसाइड नोट में लगाए गए आरोपों पर ईओ ने बात करने पर स्वयं को पूरी तरह से निर्दोष बताया है। ईओ ने कहा जो भी आरोप उन पर लगे हैं। वह निराधार हंै। पूरे मामले की जांच के बाद सारी हकीकत सामने आ जाएगी।
नगर पालिका परिषद अध्यक्ष के प्रतिनिधि अमन जायवाल उर्फ निक्की ने कहा कि मेरा इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है, न ही मैने कभी कोई हस्तक्षेप किया है। नगर पालिका में हुए टैक्स घोटाले में जो भी कार्रवाई हुई व प्रशासन के स्तर से की गई है।