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Pilibhit News: घोटाले में बर्खास्त नगर पालिका कर्मी ने दी जान, सुसाइड नोट में ईओ और लिपिक को बताया जिम्मेदार

Tue, 14 Jul 2026 10:12 AM IST
Mukesh Kumar संवाद न्यूज एजेंसी, बीसलपुर (पीलीभीत)

सार

बीसलपुर नगर पालिका के 50 लाख रुपये के कर घोटाले में बर्खास्त कर संग्रहक उपेंद्र शंखधर (52) ने आत्महत्या कर ली। उसका शव कमरे में फंदे से लटका मिला। कमरे से पांच पन्नों का सुसाइड नोट मिला है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
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उपेंद्र शंखधर का फाइल फोटो, सुसाइड नोट - फोटो : संवाद
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विस्तार
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पीलीभीत के बीसलपुर नगर पालिका के 50 लाख रुपये के कर घोटाले में बर्खास्त कर संग्रहक (टैक्स कलेक्टर) उपेंद्र शंखधर (52 वर्ष) ने सोमवार शाम मोहल्ला दुर्गा प्रसाद में अपने घर में फंदे से लटककर जान दे दी। सुसाइड नोट में उन्होंने अधिशासी अधिकारी (ईओ) शमशेर सिंह और प्रधान लिपिक अकरम खां को अपनी मौत का जिम्मेदार ठहराते हुए उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

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ईओ ने 28 सितंबर 2025 को पालिका के कर अनुभाग में 50 लाख का घोटाला पकड़ा था। मामले में रिपोर्ट दर्ज होने पर उपेंद्र शंखधर को जेल भेज दिया गया था। बाद में ईओ ने दो फरवरी 2026 को उन्हें बर्खास्त भी कर दिया था। करीब ढाई महीने जेल में रहने के बाद उपेंद्र होली से पांच दिन पहले जमानत पर रिहा हो गए थे।

पांच पन्नों का सुसाइड नोट मिला 
भाई अनुराग के मुताबिक इसके बाद से लगातार उपेंद्र का उत्पीड़न किया जा रहा था। इससे तंग आकर सोमवार को उपेंद्र ने अपने घर के कमरे में कुंडे से रस्सी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। उस वक्त उपेंद्र की पत्नी शशि देवी, मां प्रेमकांति और 15 वर्षीय बेटा अनमोल गर्मी के कारण घर के दरवाजे पर बैठे हुए थे। थोड़ी देर बाद जब पत्नी कमरे में गईं तो उन्होंने उपेंद्र को फंदे से झूलता हुए देखा। सूचना पर पहुंचे थाना प्रभारी संजीव शुक्ला को कमरे में फर्श पर पांच पन्नों का सुसाइड नोट पड़ा मिला।

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सीओ राहुल पांडेय ने बताया कि सुसाइड नोट में लगाए गए आरोपों का परीक्षण कराया जाएगा। इसके बाद आगे की कार्रवाई पर अमल कराया जाएगा।

बहाल करने के बदले रकम मांगने का लगाया आरोप
उपेंद्र ने सुसाइड नोट में कहा है कि ईओ के कहने पर उन्होंने अपने हिस्से के बताए गए 18 लाख रुपये जेवर गिरवी रखकर जमा कर दिए थे। हालांकि उन्हें इसकी रसीद नहीं दी गई और वादे के मुताबिक उन्हें बहाल भी नहीं किया गया। बहाल करने के बदले रुपये मांगे जा रहे थे। ईओ के कहने पर अकरम दबाव बनाता था।
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