पीलीभीत। जिला महिला अस्पताल के एमसीएच विंग में इन दिनों प्रसूताओं के अनावश्यक सिजेरियन ऑपरेशन से प्रसव के मामले बढ़े हैं। यह आंकड़ा प्रसव संख्या में सामान्य डिलीवरी के बराबर ही है। वहीं, बेड कम होने के चलते प्रसूताओं को खुले परिसर में पड़े बेड पर भर्ती किया जा रहा है।
जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) के तहत स्वास्थ्य विभाग की ओर से सुरक्षित प्रसव कराने व योजना का पूर्ण लाभ दिलाने की जिम्मेदारी संस्थागत होती है। सरकार गर्भवती महिलाओं के प्रसव में सिजेरियन ऑपरेशन को बढ़ावा नही देती है। अनावश्यक सिजेरियन करने पर सख्ती रखती है। मगर जिला महिला अस्पताल में इन दिनों प्रसव करने में सिजेरियन ऑपेरशन पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। इनकी संख्या सामान्य के बराबर ही पहुंच गई है। सितंबर के आंकड़ों अनुसार महिला अस्पताल में 662 गर्भवती के प्रसव किए गए। इसमें सामान्य प्रसव की संख्या 334 और ऑपरेशन से 328 रही। जनवरी से सितंबर तक कराए प्रसव में सबसे अधिक पिछले माह ही हुए हैं।
चार से पांच दिन रोकी जाती है प्रसूता
ऑपरेशन से प्रसव होने के बाद प्रसूता को कम से कम चार से पांच दिन अस्पताल में रोका जाता है। वहीं सामान्य प्रसव में अगले दिन भी छुट्टी कर दी जाती है। बेड खाली होने पर अन्य प्रसूताओं को मौका मिल जाता है। ऑपरेशन के बाद बेड खाली होने में समय लगता है।
वर्जन
पूर्व में संबंध में पत्र भेजकर जानकारी की गई थी, इसमें एमसीएच की ओर से जटिल स्थिति में गर्भवती महिलाओं का ऑपरेशन करना बताया गया। अनावश्यक सिजेरियन ऑपरेशन नहीं करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
डॉ. आलोक कुमार, मुख्य चिकित्साधिकारी