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घोषणाओं तक सीमित रहा शारदा नदी पर तटबंध

Wed, 03 May 2017 10:11 PM IST
ब्यूरो /पीलीभीत
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प्रदेश में दो दशक के भीतर कई सरकारें आई, उनके नुमाइंदों ने बरसात के समय बाढ़ से होने वाली तबाही को अपनी आंखों से देखकर तटबंध बनाने की घोषणाएं भी की, लेकिन जैसे-जैसे बरसात का समय बीतता गया, क्षेत्रवासियों की आवाज नक्कारखाने में तूती के समान कैद होती गई। जनपद में शारदा सहित नेपाल की कई नदियां बरसात में तबाही मचाती आ रही हैं। बाढ़ नियंत्रण कार्य न होने से क्षेत्रवासी तबाही की आशंका जता रहे हैं। शारदा नदी जिसे नेपाल में महाकाली के नाम से जाना जाता है। जनपद सीमा क्षेत्र में इसकी लंबाई लगभग 35 किमी से अधिक है। नदी के दाये किनारे पर 22 किमी लंबा शारदा डैम बना है। नदी से डैम की दूरी कहीं 600 मीटर तो कहीं दो से तीन किमी तक है। सिंचाई विभाग ने नदी से डैम को खतरा पैदा न हो, डैम बनाते समय मार्जनल बांध व 50 से अधिक स्पर बनाए थे, लेकिन फिर भी किसी न किसी इलाके में नदी हर साल कटान कर डैम की ओर बढ़ती जा रही है।
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वर्ष 1989 में हुई थी भारी तबाही 
तराई क्षेत्र में वर्ष 1989 में आई भीषण बाढ़ से डैम के किनारे बसे रमनगरा, ढकिया ताल्लुके महाराजपुर, गुन्हान, बिजौरीखुर्दकलां की आबादी का क्षेत्र व सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि नदी के गर्भ में समां गई थी। तबसे आज तक सैकड़ों परिवार शारदा डैम के वर्जित क्षेत्र में बसे हैं।
नेपाल की कई नदियां मिलकर मचाती है तबाही
वर्ष 1989 में बाढ़ के समय पड़ोसी देश नेपाल का इलाका भी बुरी तरह प्रभावित हुआ था। नेपाल ने विश्व बैंक की मदद से अपने कई इलाकों में तटबंध बनाने के साथ कई नदियों व पहाड़ी नालों का रुख भारतीय क्षेत्र की ओर कर दिया था। सीमा पिलर नंबर 28 के निकट वमनी नदी में डाला था। नेपाल की चौहदर नदी का पानी भी इसी ओर आता है। नेपाल ने अपने क्षेत्र में मजबूत बांध बना लिया था। जिसके चलते शारदा नदी की चौड़ाई भारतीय क्षेत्र में अधिक हो गई। 
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घोषणाओं के बाद नहीं बन सका तटबंध
पूर्व में केंद्र से एक बाढ़ सर्वेक्षण दल यहां बाढ़ की तबाही को देखने आया था। प्रदेश सरकार के दो दशक में जितने भी मुख्यमंत्री बने, लगभग सभी ने बरसात की तबाही का हवाई सर्वे कर शारदा पर तटबंध बनाने की घोषणा की थी, लेकिन इसे दुर्भाग्य ही कहा जाए कि नदी पर आज तक तटबंध नहीं बन सका।
...तो हो सकती है भारी तबाही
शारदा नदी ने गत वर्ष कंजिया सिंहपुर व नगरिया खुर्दकलां क्षेत्र मेें दाएं किनारे पर सनेढ़ी तटबंध को काफी नुकसान पहुंचाया। उसके स्परों को क्षतिग्रस्त कर दिया था, लेकिन यह इलाका शारदा सागर खंड के अधीन रहा। जबकि शारदा नदी का दायां किनारा बाढ़ खंड को दे दिए गए थे।  यह इलाका न देने की वजह से यहां कोई बाढ़ नियंत्रण कार्य नहीं कराए गए और नदी सनेढ़ी तटबंध तक आ गई। इन सबके बावजूद यहां आज तक शारदा सागर खंड द्वारा कोई बाढ़ नियंत्रण कार्य नहीं कराए गए हैं। ऐसे में यहां के लोग इस इलाके में बाढ़ के दौरान भारी तबाही होने की आशंका से ग्रस्त हैं।
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