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निगरानी के नाम पर करते रहे खानापूरी और बराही जंगल में घुस गए नेपाली हाथी

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पीलीभीत/माधोटांडा। नेपाल से आए हाथियों का झुंड आखिरकार शारदा नदी को पार कर रात बराही जंगल में आ पहुंचा। हालांकि हाथियों की आने से सूचना ग्रामीणों ने दिन में कई बार वनकर्मियों को दी, मगर किसी ने तवज्जो नहीं दी। जिसका नतीजा यह हुआ कि रात करीब आठ बजे के आसपास हाथी बराही जंगल में आ पहुंचे। मंगलवार को दोनों हाथी हल्दीडेंगा क्षेत्र से होते हुए भले ही उत्तराखंड सीमा की ओर चले गए हैं, मगर ये यहां कब लौट आए, कुछ कहा नहीं जा सकता। वहीं अगर आगे बढ़ गए तो कहीं पिछले वर्ष की तरह ही घटना की पुनरावृत्ति न हो जाए। इसको लेकर वन अफसरों में हड़कंप मचा हुआ है।
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नेपाल की शुक्ला फांटा सेंक्चुरी से करीब 25 दिन पूर्व तीन हाथियों को झुंड भारतीय इलाके में आ पहुंचा था। यहां ये हाथी टाइगर रिजर्व के लग्गा भग्गा क्षेत्र में डेरा जमाए हुए हैं। शुरूआती दौर में एक-दो दिन तक शांत रहने के बाद इन हाथियों ने ढकिया ताल्लुके महाराजपुर की गोरखडिब्बी समेत सीमावर्ती गांवों में जमकर उत्पात मचाया था। दस से अधिक किसानों की झोंपड़ियां उजाड़ने के साथ कई एकड़ धान की फसल को रौंद डाला था। टाइगर रिजर्व प्रशासन मात्र निगरानी की बात कहकर पल्ला झाड़ता रहा। इधर कुछ दिन पूर्व नेपाली हाथी शारदा नदी पार कर गभिया सहराई और नलडेंगा क्षेत्र में रात को आ धमके थे। ग्रामीणों ने जैसे तैसे हाथियों को तो गांव में घुसने से रोक लिया, मगर अपनी धान, गन्ना और केले की फसल को नहीं बचा सके थे। अगले दिन टाइगर रिजर्व प्रशासन ने दावा किया कि हाथियों को शारदा नदी के पार पुन: खदेड़ दिया गया है।
इधर हाथियों के बढ़ते आतंक के बाद भी टाइगर रिजर्व प्रशासन ने उत्पाती हाथियों को लेकर कोई गंभीरता नहीं दिखाई। इसका नतीजा यह निकला कि रविवार रात नेपाली हाथी एक बार फिर शारदा नदी को पार कर बिजोरी खुर्द कलां के जंगल में आ गए। टाइगर रिजर्व का यह जंगल बेहद कम क्षेत्रफल में है। रविवार रात ही इन हाथियों ने इलाके के जस्सा सिंह की धान की फसल रौंद डाली। जिसकी सूचना वनकर्मियों को भी दी गई। बताते हैं कि सोमवार दिन भर हाथी बिजोरी खुर्द कलां जंगल में मौजूद रहे। इसकी जानकारी ग्रामीणों ने दिन में कई बार वनकर्मियों को दी, मगर वनकर्मियों ने इसकी जानकारी न तो उच्चाधिकारियो को दी और न ही खुद झांकने की कोशिश की।
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प्रत्यक्षदर्शी ग्रामीणों के मुताबिक यह हाथी सोमवार रात करीब आठ बजे के आसपास धुरिया पलिया होते हुए बराही रेंज के सेल्हा क्षेत्र में आ धमके। सेल्हा के ग्रामीणों ने जब हाथियों को चिंघाड़ सुनी तो पूरे इलाके के फोन घनघना उठे। अधिक किसान ट्रैक्टरों से मौके पर पहुंचे और शोर मचाकर हाथियों को भागने में जुटे रहे। रात को ही हाथियों ने सेल्हा की बंगाली कॉलोनी में घुसने का प्रयास किया, मगर ग्रामीणों की सतर्कता के चलते हाथी नहीं घुस सके। रात करीब दस बजे हाथी सेल्हा इलाके को छोड़ आगे बढ़ गए। बराही रेंज में नेपाली हाथियों की आमद से वनकर्मियों को हाथ पांव फूल गए और उन्होंने तत्काल इसकी सूचना टाइगर रिजर्व के उच्चाधिकारियों को दी। इसके बाद वनकर्मी हाथियों की निगरानी में जुट गए।
कहीं फिर बरेली की ओर रुख न कर लें नेपाली हाथी
वन सूत्रों के मुताबिक मंगलवार को हाथियों के पैरों के निशान बाइफरकेशन इलाके के हल्दीडेंगा क्षेत्र में देखने को मिले। इन हाथियों के उत्तराखंड की सीमा की ओर जाने की बात सामने आ रही है। पिछले साल भी ठीक इसी तरह ही हाथियों का झुंड आया था और टाइगर रिजर्व से उत्तराखंड सीमा के समीप होते हुए बहेड़ी, बरेली से रामपुर की सीमा तक जा पहुंचा था। इन हाथियों ने पिछले साल कुछ लोगों की जान भी ले ली थी। कर्नाटक से टीम बुलवाकर हाथियों को पुन: शारदा नदी के पार खदेड़ा गया था। इसमें कई दिन लग गए थे। अब एक बार उत्तराखंड होते हुए फिर बरेली की ओर इन हाथियों के रुख होने का डर है।
हाथियों के आने की सूचना मिली थी। अब हाथी उत्तराखंड की ओर चले गए हैं। वनकर्मियों को लगातार निगरानी के लिए लगाया गया है। - नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर, टाइगर रिजर्व
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