गांव से चार किली दूरी पर है जंगल
ग्रामीणों का कहना है कि हाथी रात में ही नेपाल की ओर निकल गए। गांव से जंगल की दूरी करीब चार किलोमीटर बताई जा रही है। बराही रेंजर अरुण मोहन श्रीवास्तव ने बताया कि मौके पर हाथियों के पैरों के निशान मिले हैं। अभी यह स्पष्ट नहीं हो सका कि हाथियों की संख्या कितनी रही। टीम सर्वे के साथ हाथियों की निगरानी में जुटी है। ग्रामीणों को भी सतर्क किया गया है। थाना प्रभारी अशोक पाल ने बताया कि ग्राम प्रधान की ओर प्रार्थना पत्र दिया गया। इसमें बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है।
पांच दिन से क्षेत्र देखी जा रही थी हाथियों की मौजूदगी
ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों के झुंड में छोटे-बड़े 20 से अधिक हाथी शामिल हैं। पांच दिन पूर्व से हाथी रात के समय क्षेत्र में चहलकदमी कर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। रात में ही हाथी नेपाल की ओर लौट जाते हैं। परेशानी ग्रामीणों ने वन विभाग को भी इसकी जानकारी दी, लेकिन इसके बाद भी क्षेत्रीय वनकर्मी संजीदा नहीं हो सके। शनिवार को झुंड में हाथियों की संख्या और बढ़ गई। ग्रामीणों का कहना है कि शारदा नदी के पार का इलाका होने के बाद वनकर्मी भी कभी कभार ही आते हैं।
सोयाबीन और गन्ने की फसलों को रौंदा
हाथियों ने शनिवार रात में ही ढकिया गांव की सीमा में चितरंजन सरकार, लक्ष्मी समेत करीब पांच ग्रामीणों की झोपड़ी को तोड़ दिया। इसके अलावा कई किसानों की सोयाबीन और गन्ने की फसलों को भी नुकसान पहुंचा। ग्राम प्रधान विवेकानंद का कहना है कि पुन्नो लंबे समय से शारदा पार अकेला ही रहता था। उसके परिवार के कुछ लोग चंदिया हजारा क्षेत्र में रहते हैं। परिजनों को मुआवजा की सुविधा मिलना चाहिए। इसके साथ ही वन विभाग को हाथियों की दस्तक को रोकने के प्रयास करना चाहिए। जिससे बार- बार होने के बाद नुकसान और जनहानि को रोका जा सके।