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नेपाली हाथी बरेली जाने से रोकने को सीसीएफ ने संभाली कमान

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पीलीभीत। नेपाली हाथियों के बरेली पहुंचने की आशंका के चलते बरेली वृत्त के मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) ललित वर्मा पीलीभीत पहुंचे। सीसीएफ ने शुक्रवार को उन रूटों का निरीक्षण किया, जहां से नेपाली हाथी होकर गुजरे थे। फिलहाल अभी दोनों नेपाली हाथी उत्तराखंड के खटीमा क्षेत्र में डेरा जमाए हुए हैं।
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नेपाल की शुक्ला फांटा सेंक्चुरी से आए नेपाली हाथियों को लेकर वन महकमा सतर्क है। दो नेपाली हाथी 13 सितंबर की रात बिजौरी खुर्दकलां के जंगल में आ पहुंचे थे। हाथियों के आने की जानकारी ग्रामीणों ने वनकर्मियों को दी, मगर वनकर्मियों ने ग्रामीणों की सूचना को हवा में उड़ा दिया। इस लापरवाही का नतीजा यह निकला कि दोनों हाथी 14 सितंबर को पूरे दिन बिजौरी खुर्दकलां के जंगल में ठहरने के बाद रात करीब आठ बजे शारदा नदी को पार कर बराही रेंज के सेल्हा क्षेत्र में पहुंच गए। बराही रेंज में नेपाली हाथियों के आने की सूचना से टाइगर रिजर्व के अफसरों और वनकर्मियों में हड़कंप मच गया। 15 सितंबर को वन अफसर और वनकर्मी हाथियों को तलाश करने में जुट गए। बताते हैं कि दोनों हाथी हल्दीडेंगा क्षेत्र से होते हुए माधोटांडा-खटीमा रोड को पार कर उत्तराखंड की सीमा में जा पहुंचे। इस प्रकरण को अमर उजाला ने 16 सितंबर के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। दोनों नेपाली हाथियों के गत वर्ष की तरह बरेली की ओर जाने की आशंका भी जताई थी।
इधर शुक्रवार को सीसीएफ ललित वर्मा टाइगर रिजर्व पहुंचे। यहां उन्होंने उन रूटों का निरीक्षण किया, जहां से दोनों हाथी गुजरे थे। सीसीएफ टाइगर रिजर्व के अधिकारियों के साथ यूपी-उत्तराखंड सीमा पर पहुंचे। यहां उन्होंने उत्तराखंड के कंचनपुरी इलाके को भी देखा। बताते हैं कि दो दिन पूर्व दोनों हाथी इस इलाके में आए थे। सीसीएफ ने वन अफसरों से पूरी जानकारी लेने के बाद यूपी-उत्तराखंड बार्डर पर लगातार गश्त करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान टाइगर रिजर्व के एफडी डॉ. एच राजामोहन, डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल, वन एवं वन्यजीव प्रभाग के डीएफओ संजीव कुमार समेत रेंजर मौजूद रहे।
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