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जंगली हाथियों ने कहर बरपाया... दो झोपड़ियां तहस नहस

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माधोटांडा। जंगली हाथियों ने कई दिन की खामोशी के बाद बीती रात शारदा नदी के पार रामनगरा में किसानों की दो झोपड़ियां तहस-नहस कर दीं। उस समय परिवार सो रहा था। हाथियों के चिंघाड़ने पर लोगों ने भागकर बमुश्किल जान बचाई।
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जंगली हाथी नेपाल की शुक्ला फंटा सेंक्चुरी क्षेत्र से आकर किसानों की गेहूं की फसलों को पैरों से कुचल रहे थे। झाले भी तोड़ रहे थे। पिछले 5 दिन से हाथी इधर नहीं आए तो आसपास लोगों ने सोचा कि शायद किसी और क्षेत्र में निकल गए हैं। मगर, रविवार रात करीब 12 बजे नेपाल सीमा से सटे अंतर्राष्ट्रीय पिलर संख्या 27 और 28 के के बीच से रामनगर क्षेत्र में दो हाथी आ धमके। वे गंगाराम एवं रामदास के झालों की ओर चिंघाड़ते हुए आगे बढ़ रहे थे। हाथियों की चिंघाड़ सुनकर दोनों घरों के परिवार जान बचाते हुए बच्चों को लेकर भाग निकले और वह दूसरे लोगों के झालों में पहुंचे। हाथियों ने दोनों घरों के जाल तोड़ दिए। घर में रखा गेहूं नमक आटा चावल को भी खाया। देर तक उत्पात मचाते रहे। इस बीच पड़ोस के लोग एकत्र हो गए और शोर मचाने के बाद आग जलाकर हाथियों को खदेड़ने की कोशिश की। बहुत देर बाद बमुश्किल हाथी वापस लौटे। इस घटना से क्षेत्र के लोग चिंतित हैं। उन्हें यह भय सता रहा है कि पता नहीं कि रात को किस समय हाथी गांव में आकर नुकसान करने लगें। ग्रामीणों ने बताया हाथी घरों में घुसकर नमक आटा चावल खाते हैं। गेहूं की फसलों पैरों से कुचलते हैं। वन कर्मी सूचना देने पर पहुंचते भी हैं तो उनके पास केवल एक ही चारा है। वे कहतेे हैं कि आप सतर्क रहें। एकजुट होकर पीपे बजाकर और पटाखे दागकर हाथियों को भगाएं।
रमनगरा में रात जंगली हाथियों की सूचना मिली है। वन दरोगा और वनकर्मियों को मौके पर भेजा गया है। वनकर्मियों और ग्रामीणों को पटाखे दागकर हाथियों को खदेड़ने को कहा गया है। इसके अलावा कोई चारा नहीं है। - डीके गोयल, वन क्षेत्राधिकारी, बराही
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