फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बैरियर प्वाइंट पर प्रवेश को लेकर सपा-भाजपा नेताओं की पुलिस से कहासुनी

विज्ञापन
विज्ञापन
पीलीभीत। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के नामांकन के दौरान पांच से अधिक लोगों के बैरियर प्वाइंट से आगे प्रवेश करने को लेकर पहले सपा और फिर भाजपा नेताओं से पुलिस की नोकझोंक हुई। तीखी बहस के बाद चार विधायक , दो दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री समेत कुछ अन्य पदाधिकारियों को प्रवेश दिया गया। हालांकि जिला प्रभारी रोक दिए गए। गुस्साए जिला प्रभारी बैरियर पर तैनात इंस्पेक्टर से उलझते रहे। मगर बाद में अन्य नेताओं और पुलिसकर्मियों ने मामला शांत करा दिया।
विज्ञापन

नामांकन को लेकर प्रशासन की ओर से शनिवार को कचहरी तिराहे के पास बैरियर लगाकर पुलिस बल की तैनाती की गई थी। पहले करीब 11 बजे सपा नेता अपने जिला पंचायत अध्यक्ष पद प्रत्याशी स्वामी प्रवक्तानंद को लेकर नारेबाजी करते हुए वहां पहुंचे। भाजपा से बागी बनकर सपा में पहुंचे दूसरे जिला पंचायत सदस्य दिग्विजय सिंह, गीता देवी भी साथ थीं। बैरियर पर तैनात पुलिसकर्मियों ने सभी को रोक दिया। बहस हुई, फिर तीनों विजयी सदस्य, अधिवक्ता अमित पाठक समेत पांच लोगों को बैरियर से प्रवेश दिया गया। स्वामी प्रवक्तानंद नामांकन कराकर वापस निकले ही थे कि भाजपा प्रत्याशी डॉ. दलजीत कौर का काफिला वहां पहुंच गया। एक साइड से सपा नेताओं को वापस कर दिया गया। सपाई नारेबाजी करते हुए निकल गए। उधर, भाजपा प्रत्याशी नामांकन के लिए बैरियर से भेजी गई। बाकी सत्ताधारी नेता और जनप्रतिनिधियों को भी पुलिस ने रोक दिया। एक विधायक आगे बढ़े तो इंस्पेक्टर ने हाथ पकड़कर खींच लिया। भाजपा नेताओं ने विरोध जताया। इसके बाद सदर विधायक संजय सिंह गंगवार, पूरनपुर विधायक बाबूराम पासवान, बरखेड़ा विधायक किशनलाल राजपूत, उत्तर प्रदेश को-ऑपरेटिव यूनियन के सभापति सुरेश गंगवार, उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण एवं श्रम विकास सहकारी संघ के चेयरमैन वीरेंद्र तिवारी, जिलाध्यक्ष संजीव प्रताप सिंह, धीरेंद्र मिश्र एडवोकेट, गुरुभाग सिंह को बैरियर से भीतर भेज दिया। हालांकि कलक्ट्रेट मेन गेट से प्रत्याशी समेत सिर्फ पांच लोग ही भीतर गए। भाजपा के जिला प्रभारी पूरनलाल लोधी को प्रवेश नहीं मिला। बैरियर पर तैनात इंस्पेक्टर वीरेश कुमार ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद करीब 15 मिनट तक जिला प्रभारी और इंस्पेक्टर के बीच कहासुनी होती रही। बात इतनी बढ़ गई कि जिला प्रभारी ने इंस्पेक्टर से उसके मूल आवास के बारे में जानकारी जुटाई और एक माह के भीतर आभास कराने की बात तक कह डाली। इस पर इंस्पेक्टर ने भी कह दिया कि नाम और पता पूरा नोट कर लीजिए। इसी बीच पीछे से भाजपा के बीसलपुर विधायक रामसरन वर्मा भी आ गए। जिला प्रभारी ने उन्हें बैरियर से भीतर जाने को कहा, मगर विधायक बीसलपुर ने खुद ही इनकार कर दिया और मामला शांत कराया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें