पीलीभीत। शासन के जल जीवन मिशन-100 दिनी अभियान को उसके द्वारा नामित कार्यदायी संस्था यूपीसीएल ने ही बट्टा लगा दिया। संस्था ने छह परिषदीय स्कूलों में सबमर्सिबल पंप लगे होने के बाद भी एक-एक और पंप लगा दिया। वहीं 15 से अधिक स्कूलों में बगैर सबमर्सिबल लगाए ही पंप लगाना दर्शा दिया। मामले का खुलासा सत्यापन के दौरान हुआ तो शिक्षा विभाग के अफसरों में खलबली मच गई। बीएसए ने इसकी जानकारी डीएम और सीडीओ को दी। फिलहाल संस्था द्वारा काम करने पर रोक लगा दी गई है।
जल जीवन मिशन-100 दिनी अभियान के तहत जनपद के परिषदीय विद्यालयों में सबमर्सिबल पंप लगाए जाने थे। इसको लेकर गत वर्ष नवंबर में शासन ने बेसिक शिक्षा विभाग से हैंडपंप और सबमर्सिबल पंप को लेकर स्कूलों की सूचना मांगी थी। शासन ने स्कूलों में सबमर्सिबल पंप लगने की जिम्मेदारी यूपी प्रोजेक्ट कॉरपोरेशन लिमिटेड को दी थी। बताते हैं कि कार्यदायी संस्था ने बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों से बिना संपर्क किए ही स्कूलों में ताबड़तोड़ सबमर्सिबल पंप लगाना शुरू कर दिया। कुछ दिन पूर्व कार्यदायी संस्था ने बेसिक शिक्षा विभाग को 56 परिषदीय स्कूलों में सबमर्सिबल पंप लगाने की सूची सौंप दी। बिना सूचना दिए ही कार्यदायी संस्था द्वारा सबमर्सिबल पंप लगने की बात सुनकर बीएसए चंद्रकेश सिंह ने इसकी सूचना डीएम पुलकित खरे और सीडीओ प्रशांत श्रीवास्तव को दी। सीडीओ ने यूपीसीएल द्वारा लाए गए सबमर्सिबल पंपों के सत्यापन कराने के निर्देश दिए। (संवाद)
56 स्कूलों में सत्यापन कराया गया
सीडीओ के निर्देश के बाद मिशन कायाकल्प के कंट्रोल रूम के माध्यम से इन 56 स्कूलों में सत्यापन कराया गया। जिला समन्वयक निर्माण पंकज शाक्य के मुताबिक कंट्रोल रूम के माध्यम से कराई गई जांच में छह स्कूलों में दो-दो सबमर्सिबल पंप लगा होना पाया गया। इन स्कूलों में पंप लगे होने के बावजूद संस्था द्वारा एक-एक और पंप लगा दिया गया। वहीं 15 से अधिक ऐसे स्कूलों में नाम सूची में शामिल थे, जिसमें पंप लगा होना तो दर्शाया गया, मगर सत्यापन के दौरान पंप न लगा होने की बात सामने आई। बताते हैं कि एक पंप की कीमत 44 हजार रुपये से अधिक है। इधर, मामले का खुलासा होने पर बीएसए ने इसकी रिपोर्ट डीएम और सीडीओ को सौंप दी है।
निदेशालय से आई टीम ने भी पकड़ी थी खामियां
कुछ माह पूर्व शासन के निर्देश पर निदेशालय से आई तीन सदस्यीय टीम ने छह स्कूलों में सबमर्सिबल पंप के कार्यों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान भी कई बड़ी खामियां पाई गई। इसमें टैंक के नीचे बेस बना न होने, 60 फुट की जगह मात्र 20 फुट की गहराई में पंप लगाना पाया गया था।
परिषदीय स्कूलों में सबमर्सिबल पंप के सत्यापन में कई बड़ी खामियां पाई गई है। इसकी रिपोर्ट तैयार की जा रही है। संस्था पर उचित कार्रवाई के लिए जल्द ही शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
प्रशांत श्रीवास्तव, सीडीओ
शासन के निर्देश पर कार्यदायी संस्था यूपी प्रोजेक्ट कॉरपोरेशन लिमिटेड को परिषदीय विद्यालयों में सबमर्सिबल पंप लगाने थे। संस्था द्वारा जनपद के 56 स्कूलों में सबमर्सिबल लगाने की सूची दी गई थी। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर सत्यापन कराया गया तो कुछ स्कूलों में सबमर्सिबल पंप लगने होने क बाद भी एक-एक पंप और लगा दिया गया। कुछ स्कूलों में बगैर सबमर्सिबल पंप लगाए ही पंप लगाना दर्शाया गया। इसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है।
- चंद्रकेश सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी