पीलीभीत। जिले के परिषदीय स्कूलों के रखरखाव में खर्च की गई धनराशि की जांच होगी। वर्ष 2018-19 में स्कूलों में कंपोजिट ग्रांट के तौर पर मरम्मत, रंगाई-पुताई और अन्य छोटे कामों के लिए 6.60 करोड़ रुपये के तहत जारी किए गए थे। इस संबंध में राज्य परियोजना निदेशक किरण आनंद ने आदेश जारी कर धनराशि से किए कार्यों का सत्यापन कर रिपोर्ट शासन को भेजने के निर्देश दिए हैं।
बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से जिले में 1231 प्राथमिक और 571 उच्च प्राथमिक स्कूल संचालित किए जा रहे हैं। इन विद्यालयों में अब तक गत वर्ष रंगाई-पुताई व अन्य खर्च के लिए करीब छह हजार रुपये का बजट दिया जाता था। इधर योगी सरकार द्वारा गत वर्ष नवंबर में छात्र संख्या के आधार पर 6.60 करोड़ रुपये कंपोजिट ग्रांट के रूप में मुहैय्या कराए थे। इस धनराशि को सीधे स्कूलों के खातों में ट्रांसफर किया गया था। इस बजट में सबसे कम छात्र संख्या एक से 15 तक रखी गई। इस छात्र संख्या के लिए 12500 रुपये, 16 से 100 छात्र संख्या तक 25 हजार, 101 से 250 छात्र संख्या तक 50 हजार, 251 से 1000 संख्या तक 75 हजार रुपये की धनराशि दी जानी थी। इस धनराशि से स्कूलों में फर्स्ट एड बॉक्स, अग्निशमन यंत्र, विद्युत उपकरण, बागवानी किट, आंशिक प्लास्टर/पैच वर्क, रंगाई-पुताई के काम कराए जाने थे, लेकिन जिले के तमाम स्कूलों में खानापूर्ति कर रकम का बंटरबांट कर लिया गया। इधर, जानकारी मिलने पर अब शासन ने स्कूलों को दी गई कंपोजिट ग्रांट की जांच कराने का फरमान जारी किया है। मालूम हो कि इससे पूर्व खेलकूद और पुस्तकालय अनुदान के तहत दी गई धनराशि की जांच के आदेश भी दिए जा चुके है। राज्य परियोजना निदेशक विजय किरण आनंद ने जारी आदेश में कहा कि कंपोजिट ग्रांट के खर्च की जांच उसी जिला स्तर समिति से करवाई जाए, तो पुस्तकालय और खेलकूद अनुदान की जांच के लिए बनाई गई है। उक्त धनराशि के खर्च में गड़बड़ी पाए जाने पर अधिकारियों और शिक्षकों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इधर, इस संबंध में जिला समन्वयक (निर्माण) पंकज शाक्य ने बताया कि शासनादेश प्राप्त हो चुका है। जल्द ही सत्यापन कार्य पूरा कर शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी।