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Pilibhit News: गैस संकट से चाय पर बढ़े पांच, समोसे पर तीन रुपये

Sat, 14 Mar 2026 11:30 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
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बरखेड़ा की एक दुकान पर कोयला की भट्टी पर बनती चाय फोटो संवाद
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पीलीभीत। कमर्शियल गैस सिलिंडर की बाधित आपूर्ति का असर नाश्ते और खाने पर पड़ा है। चाय पर पांच और समोसे पर तीन रुपये तक बढ़ गए हैं। लकड़ी और कोयला खरीद कर काम चला रहे दुकानदार भी मुश्किल में हैं। शहर, माधोटांडा, बरखेड़ा, बिलसंडा और न्यूरिया में कई दुकानदारों ने खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ाए हैं। कमर्शियल सिलिंडर की समस्या का समाधान न होने पर काम बंद करने की बात भी दुकानदारों ने कही है। उधर, घरेलू गैस सिलिंडर के लिए भी हाय-तौबा मची है। एजेंसियों पर पुलिस लगानी पड़ रही है। घंटों लाइन में लगने के बाद भी उपभोक्ताओं को रसोई गैस नहीं मिल पा रही।
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कमर्शियल गैस सिलिंडर की आपूर्ति पर अस्थायी रोक लगी है। जिले की एजेंसियों पर उपलब्ध कमर्शियल सिलिंडर का स्टॉक भी खत्म होने वाला है। इसका असर पर होटल और रेस्टोरेंट पर पड़ने लगा है। साथ ही नाश्ते और खाने की थाली भी इसकी जद में आ गई है। चाय, समोसा, पकौड़ी, फेनी, खजरा आदि के दाम भी बढ़ गए हैं।

पांच से बढ़कर 10 से 15 रुपये की बिक रही चाय
माधोटांडा। गैंस सिलिंडर न मिलने से दुकानदार लकड़ी व कोयले से काम चला रहे हैं। इस पर उन्हें अधिक खर्च करना पड़ रहा है। इसका असर चाय-नाश्ते पर पड़ा है। दुकानदार पंकज ने बताया कि जैसे-तैसे काम चला रहे हैं। मजबूरी में चाय और समोसे आदि के दाम बढ़ाने पड़े। पहले पांच रुपये की चाय बेचते थे। इस समय 10 से 15 रुपये तक की बेच रहे हैं। अन्य दुकानदारों ने भी खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ाए हैं। पांच से सात पटरी दुकानदारों ने अपना काम भी बंद कर दिया है।
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रेस्टोरेंट बंद, दो रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा कोयला
बरखेड़ा। कस्बे में बस स्टैंड के पास के रेस्टोरेंट पर काम कर रहे कारीगर रामप्रकाश ने बताया कि गैस न मिलने से सारा कारोबार चौपट दिख रहा हैं। कोयला पीलीभीत से 2000 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से लाना पड़ रहा है। इस वजह से समोसे का रेट तीन रुपये बढ़ाकर आठ रुपये कर दिया गया है। पहले समोसा पांच रुपये का था। बस स्टैंड पर स्थित एक अन्य रेस्टोरेंट गैस न मिलने के कारण बंद हो गया है। ब्लॉक तिराहे के बालाजी स्वीट हाउस पर लकड़ी जलाकर मिठाई व समोसा बनाया जा रहा है। रेस्टोरेंट के मालिक राजेश सक्सेना ने बताया के गैस की अपेक्षा लकड़ी अधिक महंगी पड़ रही हैं। इस वजह से खाद्य पदार्थों पर भी दाम बढ़ाने पड़े।

लकड़ी और कोयले से चल रहा काम, महंगा हुआ सामान
न्यूरिया। बाबू स्वीट हाउस के संचालक बाबू ने बताया कि कामर्शियल सिलिंडर की कमी के कारण अब उन्हें लकड़ी का सहारा लेना पड़ रहा है। पहले लकड़ी 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल आसानी से मिल जाती थी। अब इसके दाम बढ़कर 800 से 1000 रुपये तक पहुंच गए हैं। उन्होंने बताया कि पहले खजरा फेनी 160 रुपये किलो बिकती थी। अब 180 रुपये किलो बेचना पड़ रहा है। एक अन्य दुकानदार ने बताया कि आठ रुपये का समोसा अब 10 रुपये में बेचना पड़ रहा है।

नहीं बनाई टिक्की और पकौड़े
बिलसंडा। कुछ दुकानदार कोयले और लकड़ी की भट्टी का सहारा लेने लगे हैं। कोई दूध गर्म करने के लिए डीजल और मोबिल आयल से संचालित भट्टी चला रहे हैं। एक होटल व्यवसायी ने बताया कि उनके यहां एक दिन में दो सिलिंडर की खपत थी। अब कोयला और लकड़ी भट्ठी से काम चला रहे हैं। ऐसा ही रहा तो तेज आंच पर बनने वाली रस्मलाई, गुलाब जामुन और छेना नहीं बन पाएगा। दूसरे होटल व्यवसायी ने बताया कि गैस न मिलने से रोजमर्रा में बनने वाला ब्रेड पकोड़ा और आलू की टिक्की नहीं बनाई है। समोसे पर एक रुपये बढ़ाया गया है।

बरखेड़ा की एक दुकान पर कोयला की भट्टी पर बनती चाय फोटो संवाद

बरखेड़ा की एक दुकान पर कोयला की भट्टी पर बनती चाय फोटो संवाद

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