पीलीभीत। पितृ (पूर्वजों) की आराधना और उनके प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए पितृपक्ष की शुरुआत रविवार से हो रही है। लोग तिथियों के अनुसार से पितृपक्ष के सभी 15 दिन अपने-अपने पूर्वजों को नमन करेंगे।
पितृपक्ष में पूर्वजों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान का महत्व है। यशवंतरी देवी मंदिर के पुजारी पंडित राजेश बाजपेई ने बताया कि पितृ पक्ष सात सितंबर से शुरू होकर 21 सितंबर तक चलेगा। पितृपक्ष में किए गए दान-पुण्य और तर्पण से परिवार में सुख-समृद्धि आती है। सभी तरह के कष्ट दूर होते हैं। यह भी बताया कि इस बार पितृपक्ष में एक विशेष बात है। पूर्णिमा और अमावस्या में ग्रहण है। पूर्णिमा को चंद्र ग्रहण और अमावस्या को सूर्यग्रहण होगा।
पंडित राजेश ने बताया कि पितृपक्ष में रोज सुबह स्नान करने के बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जल में काला तिल मिलाकर तर्पण करना चाहिए। श्राद्ध के दिन किसी ब्राह्मण को घर पर बुलाकर भोजन कराना शुभ माना जाता है। भोजन में खीर, पूड़ी, और उनकी पसंद की अन्य चीजें शामिल करनी चाहिए। श्राद्ध के बाद जरूरतमंदों को क्षमतानुसार दान देना चाहिए। पितृ पक्ष के 15 दिनों तक घर में सात्विक भोजन ही बनाना चाहिए।