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हादसे में पांच मौतों से शोक में डूबा जिला

Sat, 03 Sep 2016 11:38 PM IST
पीलीभीत, ब्यूरो
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हरदोई के शाहाबाद थाना क्षेत्र में सड़क हादसे में पांच लोगों की मौत की खबर से पूरा जिला शोक में डूब गया है। हादसे में मरे लोगों में पिता-पुत्र और रिश्तेदार थे। हादसे ने किसी का सुहाग छीन लिया तो किसी के बुढ़ापे का सहारा। न्यूरिया निवासी 24 वर्षीय दानिश की तो दो महीने बाद शादी होनी थी। मृतकों में दो लोग न्यूरिया कस्बा और बाकी तीन सुनगढ़ी थाना क्षेत्र के गांव नौगवां पकड़िया के रहने वाले थे। शव अभी तक घर नहीं पहुंच सके हैं। हालांकि उन्हें दफन करने की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
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सुनगढ़ी थाना क्षेत्र के गांव नौगवां से वकील आरिफ के घर से 13 लोग दो कारों में सवार होकर शनिवार सुबह चार बजे कन्नौज की मकनपुर दरगाह शरीफ पर जियारत करने के लिए निकले थे। हरदोई के शाहाबाद थाना क्षेत्र में पहुंचने पर विपरीत दिशा से आ रहे टैंकर ने जायरीन की वैगन-आर कार में टक्कर मार दी। इस कार सवार छह लोगों में से नौगवां निवासी पैंतालीस वर्षीय वकील आरिफ खां, उनके भाई अड़तीस वर्षीय परवेज, परवेज के दस वर्षीय बेटे सैफ, कस्बा न्यूरिया के मोहल्ला अब्दुल रहीम निवासी आरिफ के तैंतालीस वर्षीय बहनोई रियाज खां उर्फ राजू और चौबीस वर्षीय भांजे दानिश की मौत हो गई, जबकि आरिफ के भाई तस्लीम गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें लखनऊ के ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया है। घटना की खबर मिलते ही न्यूरिया और नौगवां ही नहीं पूरे जिले में शोक की लहर दौड़ गई। मृतकों के घरों में कोहराम मच गया। नाते-रिश्तेदारों और मिलने-जुलने वालों की भीड़ जमा होने लगी। 
वकीलों ने आरिफ के निधन पर शोक व्यक्त किया और न्यायिक कार्य से विरत रहे। 

दो माह बाद थी दानिश की शादी
पीलीभीत। दानिश के पिता छोटे खां का दस साल पहले  इंतकाल हो गया था। दानिश की पांच बहनों में से चार की शादी हो चुकी है। एक बहन 12 वर्षीय शादीन और छोटा भाई 15 वर्षीय अजमल है। पिता की मौत के बाद परिवार के पालन पोषण की जिम्मेदारी दानिश के कंधों पर ही थी। मां नसरीन की तबीयत भी अक्सर खराब रहती है। दानिश घर चलाने के लिए कस्बे के ही लकड़ी ठेकेदार नईम की टाल पर काम करता था। हाल ही में उसका निकाह मोहल्ले के ही शाहिद खां की बेटी से तय हुआ था। मंगनी की  रस्म हो चुकी थी। दो माह बाद निकाह होना था। इसकी तैयारियां जोरशोर से चल रही थीं। दानिश को दरगाह शरीफ के लिए पूरे परिवार ने हंसीखुशी विदा किया था। शनिवार को घर से निकलने के चंद घंटे बाद ही आई खबर ने पूरे परिवार को तोड़ कर रख दिया। दानिश की होने वाली ससुराल में भी कोहराम मच गया।
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रियाज के परिवार पर भी टूटा कहर
पीलीभीत।  हादसे में जान गंवाने वाले आरिफ खां के बहनोई न्यूरिया के ही मोहल्ला अब्दुल रहीम निवासी रियाज खां उर्फ राजू रेता बजरी की ठेकेदारी करते थे। उनके तीन बच्चे हैं। बड़ा बेटा शाहरूख (18) पिता के साथ काम में हाथ बंटाया करता था। छोटा बेटा मोवीन (16) इंटरमीडिएट पास करने के बाद रामपुर से स्नातक की पढ़ाई कर रहा है। बेटी शाहिदी दस साल की है। शनिवार सुबह रियाज अपने बेटे शाहरूख और दानिश के साथ निकले थे। तीनों एक ही  बाइक से पीलीभीत पहुंचे। वहां आरिफ के घर से से कार में सवार हो गए थे। रियाज की हादसे में मौत हो चुकी है और बेटा शाहरूख  जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है। हादसे में बेटे के घायल और पति की मौत की खबर मिलने के बाद से सन्नो बेगम बदहवास हैं। उनको यकीन ही नहीं हो रहा कि चंद घंटे पहले उनके सामने घर से निकले रियाज अब इस दुनिया में नहीं हैं।   
दिन भर होती रही तस्लीम की सलामती की दुआ
पीलीभीत। एक तरफ परिवार के पांच लोगों की मौत का गम और दूसरी ओर अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे घायलों की सलामती की चिंता। हर कोई गमजदा होने के बावजूद घायलों की सलामती की अल्लाह से दुआ करता दिखाई दिया। आसपास के ग्रामीण भी दुख की घड़ी में घरवालों को हिम्मत देते दिखे।  
हादसे में वकील आरिफ खां के भाई तस्लीम खां गंभीर रूप से घायल हैं। उन्हें इलाज के लिए लखनऊ के ट्रामा सेंटर में रेफर किया गया है। जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है। परिवार में पांच मौतों के बीच घरवालों को उनकी सेहत  में सुधार की चिंता सता रही है। आसपास के लोग भी घर पहुंचकर उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी लेते रहे। सलामती के लिए दुआओं का दौर भी जारी रहा।

महिलाओं से छिपाई मौत की खबर 
घर की महिलाओं को हादसे की जानकारी तो दी गई, लेकिन पांच लोगों के मरने की बात को छिपाए रखा गया। घर के बाहर जुटी भीड़ जहां पांच मौतों पर शोक व्यक्त कर रही थी, वहीं भीतर महिलाएं सबकी सलामती के लिए दुआएं कर रही थीं। बच्चे अचानक जुटी भीड़ को देख कुछ समझ ही नहीं पा रहे थे। 

नरगिस पर टूटा पहाड़, पति-बेटा खोया
03 पीबीटीपी 22,23
पीलीभीत। दरगाह शरीफ जाने के लिए बड़े भाई आरिफ खां के साथ छोटे भाई परवेज और उनका दस साल का बेटा सैफ भी था। सैफ शहर के स्प्रिंगडेल स्कूल में कक्षा चार का छात्र था। हादसे में पिता परवेज और उनके बेटे सैफ की मौत हो गई। घर पर परवेज की पत्नी नरगिस को जब हादसे का पता चला तो वह गश खाकर गिर पड़ीं। उनकी बदहवास हालत देखकर हर कोई हादसे को कोसता दिखाई दिया। देर शाम तक गांव के लोग हरदोई में कानूनी कार्रवाई करा रहे परिवार के सदस्यों से शव घर पहुंचने की जानकारी लेते रहे। 

दो कारों में सवार होकर गए थे लोग 
शनिवार सुबह करीब चार बजे सभी तेरह लोग दो कारों से मकनपुर दरगाह शरीफ जाने के लिए निकले थे। एक कार में जावेद, चांद बाबू, नदीम, लल्ला, शाहरूख और तहजीम बैठे थे। वकील आरिफ और बाकी लोग जिस वैगन आर कार में सवार थे, वह इससे आगे चल रही थी। उसे परवेज चला रहे थे। 

संयुक्त बार ने की शोकसभा 
अधिवक्ता मोहम्मद आरिफ के निधन पर शनिवार को जिला संयुक्त बार एसोसिएशन ने शोकसभा की। इसमें दो मिनट का मौन धारण कर सभी को खिराज-ए-अकीदत पेश की गई। शोकसभा में जिला जज कौटिल्य गौड़, अपर जिला जज विनय कुमार, स्पेशल जज पंकज उपाध्याय, फैमिली कोर्ट जज सत्यप्रकाश, बार अध्यक्ष किशनलाल, महेश शर्मा, धीरेंद्र मिश्र,  शिव शर्मा, अशोक पाठक, शौकत अली खां, कमशेर बहादुर गंगवार, प्रभात शंखधार,  स्नेहलता तिवारी, मंगलसेन गंगवार, अनीस, अशोक शर्मा आदि अधिवक्ता थे।


आरिफ ने अपनी मेहनत से हासिल किया था खास मुकाम
पीलीभीत। कहते हैं कि हर किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता, लेकिन अगर मेहनत का जज्बा हो तो मंजिल तक पहुंचा जा सकता है। इसी उम्मीद के साथ जिंदगी के सफर में दिनोंदिन आगे बढ़ रहे थे एडवोकेट हाजी आरिफ खां। जिले में उनकी पहचान गरीबों के मददगार के तौर पर थी। धर्म के प्रति लगाव और हर किसी की मदद को आगे आने का उनका स्वभाव लोगों को उनसे जोड़ता चला गया। उन्होंने कड़ी मेहनत और ईमानदारी के दम पर गरीब परिवार में जन्म लेने के बाद भी बेहतर मुकाम हासिल कर लिया। उनकी मौत का पता लगते ही गांव ही नहीं, दूर-दराज क्षेत्रों से भी लोग घरवालों को ढांढस बंधाने पहुंचे। पूरे दिन उनके आवास के बाहर लोगों की भीड़ लगी रही। 
वैसे तो आरिफ खां का जन्म न्यूरिया के ललपुरिया साहब सिंह गांव में हुआ था। उनका बचपन भी वहीं बीता। चूंकि गरीब परिवार से थे सो पढ़ाई के साथ-साथ परिवार की आर्थिक मदद के लिए भी लगातार प्रयास करते रहे। शुरूआत में डनलप चलाने वाले एक युवक के साथ भी काम किया। इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने एलआईसी में नौकरी की। बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाया करते थे। वर्ष 1995 में वह नौगवां पकड़िया गांव आकर रहने लगे। इसके बाद अपने भाइयों को भी यहीं बुला लिया था। एलआईसी की नौकरी के दौरान ही वकालत की। खासियत यह थी कि गरीब और मजबूर लोगों की मदद के लिए कभी पीछे नहीं हटे। उनको न्याय दिलाने के  लिए लगातार संघर्ष करते रहे। अपनी फीस भी छोड़ दिया करते थे। तीन साल पहले पिता हमीद खां का इंतकाल हो गया। एक माह पूर्व भाई परवेज ने नई कार ली थी तो सभी ने कन्नौज की मकनपुर दरगाह शरीफ जाने का कार्यक्रम बना लिया था। आरिफ के चार बच्चे नाजिस (21), महफिज (18), निखत (16), आरिश (14) है। उनकी मौत की खबर सुनकर पत्नी हाशिमी और मां जुवैदा का रो- रोकर बुरा हाल है।

एक साल पहले परिवार के साथ किया था हज 
आरिफ खां हर बार अपने परिवार वालों को साथ लेकर ही जाया करते थे। एक साल पहले वह अपनी पत्नी हाशिमी, मां जुवैदा, भाई परवेज, उनकी पत्नी नरगिस के साथ हज करने गए थे। शहर में यह भी बड़ी मिसाल बनी थी। एक ही परिवार के पांच लोग एक साथ हज पर निकले थे। 
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