पीलीभीत। बराही के जंगल में स्थित सूफी संत हजरत सेल्हा बाबा दरगाह के कमेटी से जुड़े गबन और धोखाधड़ी के मामले में न्यायालय ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए सख्त रुख अपनाया है। पुलिस की ओर से दाखिल अंतिम रिपोर्ट (एफआर) को खारिज कर अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने नामजद आरोपी को तलब करने का आदेश दिया है।
दरगाह की कमेटी के सचिव की ओर से करीब दो वर्ष पूर्व माधोटांडा थाने में अब्दुल खलीक खां के खिलाफ गबन व धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप है कि मामले में पुलिस ने सांठगांठ करते हुए जांच को प्रभावित किया और कोर्ट में अंतिम रिपोर्ट (एफआर) दाखिल कर दी।
एफआर के खिलाफ शिकायत और प्रोटेस्ट प्रार्थनापत्र पर सुनवाई करते हुए अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुंदर पाल ने पुलिस की रिपोर्ट को खारिज कर दिया। न्यायालय ने इस मामले में कहा कि प्रस्तुत पत्रावली और केस डायरी के अनुसार अभियुक्त पर सेटलमेंट समिति के लेटर पैड पर फर्जी अनुमतिपत्र तैयार करने का आरोप है। यह भी आरोप है कि बिना किसी वैधानिक अधिकार के तैयार किए गए इन दस्तावेजों का वास्तविक बताकर उपयोग किया गया।
रिकॉर्ड से स्पष्ट हुआ कि जिस अवधि की अनुमति दर्शाई गई है, उस समय अभियुक्त को ऐसी स्वीकृति देने का कोई अधिकार नहीं था। साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने अभियुक्त के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता पाया और अब्दुल खलीक खां को तलब करने के आदेश दिए। अदालत के आदेश के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई तेज हो गई है।