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पीलीभीत: एलिवेटेड हो सकता है धनाराघाट पुल का एप्रोच मार्ग, जंगल में नहीं कटेंगे ज्यादा पेड़

Tue, 15 Sep 2026 02:04 PM IST
Mukesh Kumar संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत

सार

पीलीभीत में शारदा नदी पर 279 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे धनाराघाट पुल का एप्रोच मार्ग अब एलिवेटेड किया जा सकता है। संशोधित प्रस्ताव पर वन विभाग ने सकारात्मक राय राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (एनबीडब्ल्यूएल) दिल्ली को भेजी है।
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धनाराघाट पर निर्माणाधीन पुल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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पीलीभीत के पूरनपुर तहसील क्षेत्र में शारदा नदी पर धनाराघाट में 279 करोड़ की लागत से बन रहे पुल के एप्रोच मार्ग को अब एलिवेटेड किए जाने की तैयारी है। वन क्षेत्र में पेड़ों की कटाई रोकने और वन्यजीवों के प्राकृतिक कॉरिडोर को सुरक्षित रखने के लिए तैयार किए गए संशोधित प्रस्ताव पर वन विभाग ने सकारात्मक राय राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (एनबीडब्ल्यूएल) दिल्ली को भेजी है। इसके बाद परियोजना से जुड़े अधिकारियों में हलचल बढ़ गई है।

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 सोमवार को सेतु निगम के अधिकारी ने पहले डीएफओ मनीष सिंह और फिर डीएम ज्ञानेंद्र सिंह से मुलाकात की। दोनों अधिकारियों के साथ प्रस्तावित संरचना की डिजाइन, संभावित लागत और तकनीकी अड़चनों को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। 

पुल बनने से तय नहीं करना पड़ेगा लंबा रास्ता 
लखीमपुर और पीलीभीत के पूरनपुर के बीच शारदा नदी पर धनाराघाट में इस महत्वपूर्ण सेतु का निर्माण कराया जा रहा है। इसके बनने के बाद पूरनपुर के ट्रांस क्षेत्र से लखीमपुर की कनेक्टिविटी आसान हो जाएगी। क्षेत्र के लोगों को नदी पार करने के लिए लंबा रास्ता तय नहीं करना पड़ेगा। परियोजना के तहत शारदा नदी के हिस्से में पुल का काफी काम पूरा हो चुका है। अब दूसरी ओर एप्रोच मार्ग तैयार किया जाना है, लेकिन यह हिस्सा वन क्षेत्र से जुड़ा होने के कारण परियोजना के सामने पेड़ों की कटाई की चुनौती खड़ी हो गई। 

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वन्यजीवों के रास्ते में नहीं आएगा पुल 
धनाराघाट क्षेत्र में वन्यजीवों की आवाजाही को देखते हुए जंगल में एप्रोच मार्ग के लिए बड़े पैमाने पर 225 हरे पेड़ों की कटाई होने की आशंका जताई गई थी। इसी को लेकर एनबीडब्ल्यूएल ने पूर्व के प्रस्ताव पर संशोधन मांगा था। वन विभाग ने अब इसका विकल्प एलिवेटेड संरचना के रूप में सामने रखा है। इसमें नदी से आगे जंगल वाले हिस्से में सड़क को जमीन पर फैलाने के बजाय पिलर के सहारे ऊंचाई पर ले जाने की योजना है। 

यदि इस प्रारूप को मंजूरी मिलती है तो वन क्षेत्र में जमीन की जरूरत कम होगी। इससे पेड़ों के कटान का दायरा घटने के साथ वन्यजीवों के आवागमन के लिए नीचे प्राकृतिक रास्ता उपलब्ध रह सकेगा। जंगल के भीतर वाहनों की आवाजाही भी एक सीमित क्षेत्र तक केंद्रित रहेगी। इससे संवेदनशील कॉरिडोर में इंसानी दखल कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

बढ़ सकती है परियोजना की लागत 
एलिवेटेड संरचना तैयार करने से परियोजना की लागत बढ़ने की संभावना भी है। पिलर आधारित निर्माण, अतिरिक्त तकनीकी कार्य और डिजाइन में बदलाव के कारण खर्च का नया आकलन करना होगा। इसी वजह से सोमवार को अधिकारियों के बीच लागत के साथ संरचना की तकनीकी व्यवहारिकता पर भी मंथन किया गया। सेतु निगम के अधिकारी ने सोमवार को डीएफओ मनीष सिंह से मुलाकात के बाद डीएम ज्ञानेंद्र सिंह से वार्ता की। 

डीएम ने परियोजना से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी ली। खासतौर पर एलिवेटेड डिजाइन से होने वाले बदलाव और उससे जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की गई। डीएम ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधि से कई बिंदुओं पर वार्ता हुई है। एलिवेटेड पुल को लेकर जो भी चिंताएं हैं, उन पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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ध्वनि और वायु प्रदूषण भी होगा सीमित 
एलिवेटेड एप्रोच का एक महत्वपूर्ण लाभ वाहनों से होने वाले ध्वनि और वायु प्रदूषण को लेकर भी माना जा रहा है। जमीन पर लंबी सड़क बनने से जंगल का बड़ा हिस्सा प्रभावित होता, जबकि ऊंची संरचना के माध्यम से प्राकृतिक क्षेत्र को अपेक्षाकृत कम नुकसान पहुंचने की संभावना है। इससे हरियाली बचाने के साथ वन्यजीवों के विचरण क्षेत्र को भी संरक्षित रखा जा सकेगा।

दिल्ली की मंजूरी पर टिकी निगाह 
वन्यजीवों और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए संशोधित प्रस्ताव पर वन विभाग की सकारात्मक रिपोर्ट दिल्ली भेजे जाने के बाद अब एनबीडब्ल्यूएल के निर्णय पर निगाह है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो धनाराघाट सेतु की एप्रोच को एलिवेटेड रूप में तैयार करने का रास्ता साफ हो सकता है। इससे एक ओर लखीमपुर और पूरनपुर के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी, वहीं दूसरी तरफ जंगल, हरियाली और वन्यजीवों के आवागमन को भी अपेक्षाकृत कम नुकसान पहुंचने की उम्मीद है।
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