वन्यजीवों के रास्ते में नहीं आएगा पुल
धनाराघाट क्षेत्र में वन्यजीवों की आवाजाही को देखते हुए जंगल में एप्रोच मार्ग के लिए बड़े पैमाने पर 225 हरे पेड़ों की कटाई होने की आशंका जताई गई थी। इसी को लेकर एनबीडब्ल्यूएल ने पूर्व के प्रस्ताव पर संशोधन मांगा था। वन विभाग ने अब इसका विकल्प एलिवेटेड संरचना के रूप में सामने रखा है। इसमें नदी से आगे जंगल वाले हिस्से में सड़क को जमीन पर फैलाने के बजाय पिलर के सहारे ऊंचाई पर ले जाने की योजना है।
यदि इस प्रारूप को मंजूरी मिलती है तो वन क्षेत्र में जमीन की जरूरत कम होगी। इससे पेड़ों के कटान का दायरा घटने के साथ वन्यजीवों के आवागमन के लिए नीचे प्राकृतिक रास्ता उपलब्ध रह सकेगा। जंगल के भीतर वाहनों की आवाजाही भी एक सीमित क्षेत्र तक केंद्रित रहेगी। इससे संवेदनशील कॉरिडोर में इंसानी दखल कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
बढ़ सकती है परियोजना की लागत
एलिवेटेड संरचना तैयार करने से परियोजना की लागत बढ़ने की संभावना भी है। पिलर आधारित निर्माण, अतिरिक्त तकनीकी कार्य और डिजाइन में बदलाव के कारण खर्च का नया आकलन करना होगा। इसी वजह से सोमवार को अधिकारियों के बीच लागत के साथ संरचना की तकनीकी व्यवहारिकता पर भी मंथन किया गया। सेतु निगम के अधिकारी ने सोमवार को डीएफओ मनीष सिंह से मुलाकात के बाद डीएम ज्ञानेंद्र सिंह से वार्ता की।
डीएम ने परियोजना से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी ली। खासतौर पर एलिवेटेड डिजाइन से होने वाले बदलाव और उससे जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की गई। डीएम ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधि से कई बिंदुओं पर वार्ता हुई है। एलिवेटेड पुल को लेकर जो भी चिंताएं हैं, उन पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
ध्वनि और वायु प्रदूषण भी होगा सीमित
एलिवेटेड एप्रोच का एक महत्वपूर्ण लाभ वाहनों से होने वाले ध्वनि और वायु प्रदूषण को लेकर भी माना जा रहा है। जमीन पर लंबी सड़क बनने से जंगल का बड़ा हिस्सा प्रभावित होता, जबकि ऊंची संरचना के माध्यम से प्राकृतिक क्षेत्र को अपेक्षाकृत कम नुकसान पहुंचने की संभावना है। इससे हरियाली बचाने के साथ वन्यजीवों के विचरण क्षेत्र को भी संरक्षित रखा जा सकेगा।
दिल्ली की मंजूरी पर टिकी निगाह
वन्यजीवों और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए संशोधित प्रस्ताव पर वन विभाग की सकारात्मक रिपोर्ट दिल्ली भेजे जाने के बाद अब एनबीडब्ल्यूएल के निर्णय पर निगाह है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो धनाराघाट सेतु की एप्रोच को एलिवेटेड रूप में तैयार करने का रास्ता साफ हो सकता है। इससे एक ओर लखीमपुर और पूरनपुर के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी, वहीं दूसरी तरफ जंगल, हरियाली और वन्यजीवों के आवागमन को भी अपेक्षाकृत कम नुकसान पहुंचने की उम्मीद है।