बरखेड़ा। गांव पौटा कलां स्थित श्री गंगेश्वरनाथ मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कथावाचक केशव माधव ने भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का अत्यंत मनमोहक प्रसंग सुनाया। संगीतमय कथा के माध्यम से प्रस्तुत किए गए इस प्रसंग ने उपस्थित सभी भक्तों को भाव विभोर कर दिया।
कथावाचक ने बताया कि माता सती के देहत्याग के पश्चात भगवान शिव गहन तपस्या में लीन हो गए थे। इसके उपरांत माता सती ने पर्वतराज हिमालय और माता मैना के यहां पार्वती के रूप में जन्म लिया। भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए माता पार्वती ने कठोर तपस्या की, जिससे प्रसन्न होकर शिवजी ने उनका वरण किया। देवताओं, ऋषि-मुनियों और समस्त शिवगणों की उपस्थिति में हिमालय के आंगन में भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ। यह प्रसंग श्रद्धा, तप, प्रेम और शिव-शक्ति के पवित्र मिलन का प्रतीक माना जाता है। कथा के दौरान भजनों और संगीतमय प्रस्तुतियों पर श्रद्धालु झूम उठे। कथा के विश्राम के बाद मंदिर के पुरोहित बाबा गंगास्वरूप ने उपस्थित सभी भक्तों को प्रसाद वितरित किया। संवाद