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देवहा, खकरा, गोमती को भगीरथ का इंतजार

Tue, 04 Apr 2017 10:09 PM IST
ब्यूरो /पीलीभीत
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देवहा, खकरा, गोमती को भगीरथ का इंतजार
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अवध नगरी की शोभा बढ़ाने वाली गोमती, देवाहुति कही जाने वाली देवहा नदी व खकरा नदी प्रदूषित होती जा रही है जब कि जिम्मेदार लोग मौन धारण किए हुए हैं। आस्था से जुड़ी इन नदियों में अरसे से गंदे पानी के नाले बहाए जा रहे हैं। प्रदेश के नए मुख्यमंत्री आदित्य नाथ योगी द्वारा नदियों मे गंदे पानी के नाले बहाने पर अंकुश लगाने की मंशा के बाद पीलीभीत क्षेत्र के लोगों को भी उम्मीद हैं कि उनकी पालनहार बनी नदियों को भी मैला होने से बचाया जाएगा।
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गोमती में भी गंदा पानी बहाने की तैयारी
अवध नगरी समेत 14 शहरों के लिए जीवनदायिनी बनी गोमती नदी का दम भी घुट रहा है। सदानीरा के नाम से जानी जाने वाली इस नदी के माधोटांडा स्थित उद्गम स्थल पर गंदे पानी के नाले बरसों से बह रहे हैं। नदी के अस्तित्व को बचाने के लिए सवा दो करोड़ का प्रोजेक्ट बनाकर माधोटांडा रजबहा से उद्गम स्थल तक स्वच्छ पानी लाने की कवायद चल रही है, लेकिन पुराने नाले की ही खुदाई कर 25 क्यूसेक पानी पहुंचाने का खेल चल रहा है। इस पुराने नाले में कई अन्य गंदे पानी के नाले गिर रहे हैं। ऐसे में जब इस नहर में पानी छूटेगा तो कस्बे का गंदा पानी भी इसी रास्ते होते हुए पहुंचेगा।
देवहा नदी में भी गिर रहा नाले का पानी
जिले की लाइफ लाइन कहीं जाने वाली देवहा नदी 122 किमी का सफर तय करने के बाद शाहजहांपुर की रामगंगा में मिलती है। देवाहुति गंगा के नाम से जानी जाने वाली इस नदी में शहर भर का गंदा पानी बड़े नाले के जरिए बहाया जा रहा है। वहीं इसकी तलहटी मेें रोजाना शहर का कई टन कूड़ा करकट भी फेंका जा रहा है। नतीजा यह हुआ कि धार्मिक आस्था से जुड़ी इस नदी का पानी का रंग काला हो चुका है। इसे पीने और नहाने के लायक भी लोग नहीं मानते हैं।
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खकरा नदी में मिल रहे हैं नाले
देवहा की सहायक नदी खकरा शहर के उत्तर-पश्चिम में बहती हुई ब्रह्मचारी घाट पर देवहा में विलीन होती है। जिले के करीब 25 किमी लंबा सफर करने वाली इस नदी में एक नहीं बल्कि दो स्थानों पर शहर के गंदे पानी के नाले मिलाए गए हैं। इसके चलते इस नदी का पानी भी विषैला हो चुका है। यही वजह है कि पूर्व में त्योहारों पर जहां लोग नदियों में डुबकी लगाते थे लेकिन वर्तमान में ज्यादातर लोग घरों में स्नान कर पूजा पाठ करना पसंद कर रहे हैं।
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