जनसंख्या को काबू करने के लिए भले ही सरकार करोड़ों रुपये खर्चे कर रही हो, लेकिन कुछ योजनाएं हीलाहवाली के चलते अंधकार में गोते लगा रही हैं। जिले में पुरुष नसबंदी योजना का कुछ ऐसा ही हाल है। महकमे के आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में पिछले चार साल से मात्र पांच पुरुष नसबंदी ही हो सकी है।
यह है पुुरुष नसबंदी का हाल
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन योजना के अंतर्गत सरकारी अस्पतालों में नसबंदी कराने वाले पुरुष को 1100 रुपये और महिलाओं को 600 रुपये प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान है। अब जिले में पुरुष नसबंदी कार्यक्रम पर गौर करें तो वर्ष 2012 से पुरुष नसबंदी का ग्राफ निरंतर गिरता जा रहा है। वर्ष 2012-13 में तीन, 2013-14 में एक, 2014-15 में शून्य, जबकि 2015-16 में मात्र एक पुरुष की नसबंदी की गई।
कैंपों के नाम पर हो रही खानापूरी
वर्ष 2009 में ब्लाक लेबिल पर पुरुष नसबंदी कैंपों का आयोजन किया गया था, लेकिन उसके बाद मामला ठंडा होता गया। महकमा इसके पीछे एनएसवी सर्जन न होने की बात कह रहा है। फिलहाल, इसके पीछे कारण जो भी रहे हो, लेकिन विभागीय अधिकारी इसमें कतई दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं।
जिले में सर्जनों की कमी है। महकमे से वीआरएस ले चुके एक सर्जन के माध्यम से नसबंदी कराई जातीं हैं। नसबंदी कार्यक्रम को गति देने को हाल ही में बैठक हुई है। जल्द ही पांच पुरुष नसबंदी आपेरशन किए जाएंगे।
- डॉ. एके वर्मा, नोडल अधिकारी, आरसीएच
यह है हाल
वर्ष इतनी हुई नसबंदी
2012-13 03
2013-14 01
2014-15 00
2015-16 01