पीलीभीत। विभागीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी से वर्षाें से जर्जर किराये के भवन में संचालित हो रहा आयुर्वेदिक अस्पताल चिकित्सकों व मरीजों के लिए खतरा बना हुआ है। यहां रोजाना करीब 50 मरीज उपचार कराने पहुंचते हैं, बावजूद इसके जिम्मेदार इसकी स्थिति सुधारने की दिशा में कदम नहीं उठा रहे हैं।
मरीजों की सहूलियत के लिए बरखेड़ा क्षेत्र के गांव ज्योरहा कल्यानपुर में 50 वर्ष पूर्व आयुर्वेदिक अस्पताल को एक किराये के भवन में संचालित किया गया था। वर्षों बीत जाने के बाद भी अस्पताल आज भी उसी भवन में चल रहा है। जबकि अब भवन की दीवारों व लिंटर का प्लास्टर छूट कर गिर रहा है। कच्ची जमीन से हर समय सीलन की बदबू आती है तो बारिश के दौरान भवन की छतें टपकती हैं।
आलम यह है कि बारिश के दौरान यहां पर न तो चिकित्सक आ पाते हैं और न ही मरीज आने की हिम्मत जुटा पाते हैं। बता दें कि इस आयुर्वेदिक अस्पताल में इमलिया, फूटा कुंआ, बरगदा, सिमरिया ताराचंद, मचवाखेड़ा, डंडिया राधे, खजुरिया पचपेड़ा, अमखेड़ा लखनऊ, काजरबोझी, लखाखास, दौलापुर समेत करीब 25 गांवों के हजारों मरीज उपचार कराने के लिए पहुंचते हैं।
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नहीं है बिजली का कनेक्शन
बिजली कनेक्शन के लिए सरकार योजनाएं चला रही है। बावजूद इसके आयुर्वेदिक भवन में आज तक बिजली कनेक्शन नहीं हो सका है। डॉक्टरों ने यहां सौर पैनल से बिजली की व्यवस्था की है।
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अस्पताल की स्थिति काफी खराब हो चुकी है। बरसात के मौसम में यहां पर कीड़े-मकौड़ों का खतरा बना रहता है। भवन भी गिरने का डर बना हुआ है।
- धर्मपाल, इमलिया
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अधिकारी अनहोनी के इंतजार में बैठे हैं। इसलिए ही भवन की मरम्मत नहीं करा रहे हैं। जबकि काफी संख्या में लोग नियमित यहां पर आते हैं।
- पुष्पा देवी, अमखेड़ा लखनऊ
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जल्द ही अस्पताल को नए भवन में शिफ्ट करा दिया जाएगा। कुछ कार्य शेष बचे हैं। जिन्हें अधिकारियों के नेतृत्व मेें किया जा रहा है।
- डॉ.राजीव सक्सेना, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक यूनानी अधिकारी
आयुर्वेदिक अस्पताल जियोरहा कल्यानपुर में मरीज देखती चिकित्सक।संवाद
आयुर्वेदिक अस्पताल जियोरहा कल्यानपुर में मरीज देखती चिकित्सक।संवाद
आयुर्वेदिक अस्पताल जियोरहा कल्यानपुर में मरीज देखती चिकित्सक।संवाद