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अंगूठे का क्लोन बनाकर ग्रामीणों के खाते खाली कर रहे साइबर ठग

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Cyber ??thugs emptying accounts by making thumb clone
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पीलीभीत। अगर आपके क्षेत्र में कोई जनधन खाता खोलने या किसी सरकारी योजना का लाभ दिलाने के लिए आपके आधार की बायोमीट्रिक करा रहा है तो थोड़ा सतर्क हो जाएं। ये आपको भारी भी पड़ सकता है। आपका खाता खाली हो सकता है, क्योंकि जिले में पिछले कुछ महीनों में इस तरह के केस बढ़े हैं।
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अंगूठे या अंगुलियों के निशान बायोमीट्रिक तरीके से लेेने के बाद क्लोन बनाकर खातों से रुपये निकाले जा रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में साइबर सेल के पास इस तरह की करीब सौ शिकायतें पहुंची हैं। डिजिटल युग में लोगों का डाटा भी डिजिटल हो रहा है, जिसका फायदा साइबर ठग उठा रहे हैं। इन दिनों लगभग हर सरकारी योजना में आधार और केवाइसी कराई जाती है।
जनधन खाता खुलवाना हो या ई-श्रम कार्ड बनवाना हो, सभी में आधार और केवाईसी की जरूरत पड़ती है। साइबर सेल के पास पिछले दो-तीन महीनों में ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ी शिकायतें ज्यादा पहुंची हैं। इसमें अमरिया, मझोला, न्यूरिया की शिकायतें ज्यादा हैं। जिला साइबर सेल और थानों में बने साइबर हेल्प डेस्क पर करीब सौ शिकायतें पहुंची हैं, इसमें अधिकतर आधार द्वारा रुपये निकाले जाने की हैं। इससे बचना है तो सभी को जागरूक होना होगा।
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इस तरह करते हैं ठगी - उदाहरण के लिए अगर आपने कहीं आधार से बायोमीट्रिक कराई तो आपको पॉस मशीन पर अंगूठा लगाना होगा। साइबर ठग पॉस मशीन पर एक खास तरह का मैैटेरियल लगाते हैं, जिससे अंगूठे के निशान हूबहू उतर आते हैं। सॉफ्टवेयर के माध्यम से निशान स्कैन भी कर लेते हैं। इन्हीं अंगूठे के निशानों के जरिए बिना ओटीपी हासिल किए ठग खाते से रुपये चुरा लेते हैं।
साइबर ठगी का हों तो तत्काल दर्ज कराएं शिकायत
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल -https://www.cybercrime.gov.in/ पर भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इस नंबर पर शिकायत दर्ज कराते ही खाते से ट्रांसफर किया गया पैसा संबधित बैंक के माध्यम से होल्ड करा दिया जाएगा। जिले में कई लोगों का पैसा इसी तरह से वापस उनके खातों में कराया गया है। इसके अलावा जिले के सभी 14 थानों में साइबर हेल्प डेस्क बनाई गई है, यहां शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
केस एक: मझोला क्षेत्र के एक ग्राम प्रधान के परिवार के एक व्यक्ति के खाते से 26 हजार रुपये निकाल लिए गए। इसकी शिकायत साइबर सेल में दर्ज कराई गई। साइबर सेल की मदद से उनका पैसा वापस हो गया। उन्होंने साइबर सेल को बताया कि एलईडी बल्ब लिया था तो आधार कार्ड से बायोमीट्रिक कराया था। उसके बाद उनके खाते से रुपये निकल गए।
केस दो: साइबर सेल में अमरिया क्षेत्र के एक महिला ने शिकायत दर्ज कराई थी। उसने जनधन खाता खुलवाया था। बाद में खाते में जमा करीब चार हजार रुपये निकाल लिए गए। जब उसने साइबर सेल में शिकायत की तब उसका रुपया वापस कराया गया।
केस तीन: न्यूरिया क्षेत्र के एक युवक के खाते से दस हजार रुपये निकाल लिए गए। उसने ऑनलाइन लोन के लिए आवेदन किया था। लोन के लिए बायोमीट्रिक तरीके से डेटा देने के बाद उसके साथ ठगी की गई है।
क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़वाने के नाम पर भी हो रही ठगी
कोरोना काल के बाद से क्रेडिट कार्ड का उपयोग बढ़ा है। इसका फायदा साइबर ठग उठा रहे हैं। क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़वाने के लिए कॉल करते हैं और जानकारी जुटाकर क्रेडिट कार्ड से सारा पैसा निकाल लेते हैं। साइबर एक्सपर्ट अनुज अग्रवाल के अनुसार पिछले कुछ समय से इस तरह के केस ज्यादा हुए हैं। कई-कई लाख रुपये क्रेडिट कार्ड से निकाल लिए गए।
बैंक कभी भी उपभोक्ताओं से ओटीपी नहीं पूछता। क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़वाने के लिए अगर कोई कॉल आए तो एक बार अपनी शाखा में जाकर जरूर जानकारी कर लें। किसी अनजान व्यक्ति को अपना मोबाइल न दें। केवाईसी के नाम पर ठगी हो रही हैं। लोगों को उससे भी सतर्क रहने की जरूरत है।
- गौरव कुमार, लीड बैंक मैनेजर
अंगूठे का क्लोन बनाना बहुत आसान हो चुका है। कई चाइनीज मैटेरियल बाजार में उपलब्ध हैं, जिनकी मदद से केवाईसी करते वक्त अंगुलियों के निशान लिए जा सकते हैं। कॉमन सर्विस सेंटर से आसानी से ठगी हो जाती है। पिछले दिनों दिल्ली, नोएडा में इस तरह के गिरोह भी पकड़े गए हैं। लोगों को जागरूक होने की जरूरत है।
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- अनुज अग्रवाल, साइबर एक्सपर्ट
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