पीलीभीत। जनपद में बांस की पैदावार को अब पंख लगेंगे। वन अनुसंधान केंद्र की ओर से भेेजे गए प्रस्ताव पर केंद्र की मंजूरी मिल गई है। जल्द ही पैदावार की रूपरेखा तैयार की जाएगी। इससे बांसुरी कारीगरों को काफी सहुलियत मिल सकेगी।
बांसुरी नगरी के रूप में मशहूर जनपद में बांसुरी बनाने में प्रयोग किए जाने वाले बांस की पैदावार नहीं होती थी। असम से बांस को मंगवाया जाता था। इसके लिए कारीगरों को तमाम परेशानियां झेलनी पड़ती थी। आर्थिक बोझ भी बढ़ जाता था। शहर के सिविल लाइन साउथ निवासी सामाजिक कार्यकर्ता शिवम कश्यप ने बांसुरी कारीगारों की समस्या के बाबत बांस की पैदावार को लेकर पत्राचार किए थे। उन्होंने पारि पुनर्स्थापन वन अनुसंधान केंद्र प्रयागराज को पत्र लिखा था। जिसमें वातावरण को अनुकूल बताकर बांस की बेहतर पैदावार होने की बात लिखी थी। पत्र को संज्ञान में लिया गया, नतीजतन 24 फरवरी को संस्थान की तीन सदस्यीय टीम ने जनपद का दौरा कर कई इलाकों की भौगोलिक स्थिति को परखा था। टीम ने बनकटी समेत अन्य इलाकों का भ्रमण करने के बाद बांस की पैदावार के लिए क्षेत्र को अनुकूल बताया था। पूरे मामले की रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी। केंद्र की ओर से चार दिन पूर्व प्रस्ताव को मंजूर कर लिया गया है। इससे अब जनपद के बांसुरी कारीगरों को काफी सहूलियत मिल सकेगी। अधिक खर्च भी बच सकेगा। परियोजना सहायक राहुल सिंह ने बताया कि प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। जल्द ही पीलीभीत जनपद में बांस की पैदावार से संबंधित कार्य शुरू किए जाएंगे।