सूचना पर पहुंची सामाजिक वानिकी की टीम के चेतन कुमार व वन्य जीव प्रभारी सोनी सिंह ने बताया कि मगरमच्छ के हमले में वृद्ध की मौत की पुष्टि अभी नहीं हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता लगेगा कि रामभरोसे की मौत कैसे हुई। उधर, घटनास्थल पर मौजूद ग्रामीणों ने नदी में दो-तीन मगरमच्छ देख जाने की बात कही है।
दूसरे शहरों में मेहनत-मजदूरी करते हैं मृतक के पुत्र
मृतक रामभरोसे के छत्रपाल, रामगोपाल व प्रेम पाल तीन पुत्र है। दो बेटे अपने बच्चों के साथ गुजरात और राजस्थान में रहकर मेहनत-मजदूरी करते हैंं। बेटा रामगोपाल हल्द्वानी में काम करता है। उसकी पत्नी व बच्चे गांव में रहते हैं। रामभरोसे भी इनके साथ रहते थे। बुजुर्ग की मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।