गांव भूड़ा के एक घर में घुसे बदमाशों ने छत पर सो रहे 30 वर्षीय नरेश उर्फ बबलू के सिर में गोली मार दी। गंभीर हालत में उसे शहर के एक निजी अस्पताल के आईसीयू में रखा गया है। घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है।
गांव भूड़ा निवासी कालीचरन ने बताया कि उसका पुत्र नरेश उर्फ बबलू अपने ममेेरे भाई प्रमोद के साथ सो रहा था। कुछ दूरी पर पत्नी राजेश्वरी और पुत्र हिमांशु चारपाई पर लेटा था। तड़के करीब तीन बजे बदमाश पीछे की दीवार के सहारे छत पर चढ़ गए और नरेश के सिर पर 12 बोर के तमंचे से गोली मारी और भाग निकले। भागते समय बदमाशों ने गांव में भी दो फायर किए। गोली की आवाज से पत्नी और भाई प्रमोद तथा पड़ोस की छत पर सो रही चचेरी बहन मिथलेश हड़बड़ा के जागे। देखा नरेश खून से लथपथ बिस्तर पर तड़प रहा था। शोरशराबा होने पर गांव के तमाम लोग भी मौके पर जमा हो गए और घटना की सूचना पुलिस को दी। हाइवे पर गश्त कर रही ललौरीखेड़ा पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। घायल नरेश को आननफानन में जिला अस्पताल भेजा, जहां डॉक्टर ने हालत गंभीर होने पर उसे बरेली रेफर कर दिया। घर वालों ने उसे शहर के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया है। डॉक्टर ने घायल को आईसीयू में भर्ती कर उपचार शुरू कर दिया है। घटना की सूचना पर मौके पर पहुंचे सीओ निर्मल कुमार विष्ट, एसओ ने घटना स्थल का निरीक्षण किया। घर वालों और आसपास के लोगों से घटना की बाबत जानकारी ली। पुलिस ने मौके से खून से सना अंगोछा, बिस्तर के नीचे पड़ी पल्ली और घर के सामने सड़क पार नाली में पड़ा 12 बोर का मिस कारतूस कब्जे में लिया है।
घटना के बाद गांव वालों में खौफ है। लोगों का कहना है कि गांव में लगातार चोरी, लूट की घटनाएं हो रहीं हैं, लेकिन पुलिस कोई ध्यान नहीं दे रही। गांव में गश्त के नाम पर भी खानापूरी की जा रही है। सीओ निर्मल कुमार विष्ट ने बताया कि घर वाले बदमाशों की संख्या नहीं बता पा रहे हैं। बदमाश यदि होते तो वह लूटपाट करते, लेकिन लूटपाट करने के बजाय सोते में ही गोली मार देना किसी रंजिश की ओर इशारा कर रहा है। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है। घायल के परिवार के लोग अभी अस्पताल में हैं। घटना की तहरीर नहीं दी गई है। तहरीर मिलने पर रिपोर्ट दर्ज की जाएगी।
... कहीं पहचान होने के डर से तो नहीं मारी गोली
जहॉनाबाद। पांच दिन पहले गांव भूडा निवासी घायल नरेश के घर हजारों रूपये की चोरी हो चुकी थी। तहरीर देने के बाद भी पुलिस ने न तो जांच की न ही रिपोर्ट दर्ज की थी। अगर पुलिस चोरी की घटना की रिपोर्ट दर्ज कर लेती और थोड़ा सतर्क होती तो शायद बदमाश दोबारा घटना को अंजाम नहीं दे पाते। माना जा रहा है कि चोरों ने नरेश उर्फ द्वारा पहचान करने के शक पर घटना को अंजाम दिया होगा। पुलिस भी इस आशंका से इंकार नहीं कर रही है।
खेती किसानी करने वाले नरेश उर्फ बबलू के पिता को चार महीने पहले पैरालाइसिस के अटैक पड़ चुका है। 29 जून की रात उसके घर से जेवरातों समेत करीब 70 हजार रुपये का सामान चोरों ने चुरा लिया था। आहट होने पर जब नरेश की आंख खुली और उसने चोरों को पकड़ने का प्रयास किया तो एक चोर ने पास में पड़े गड़ासे से उस पर प्रहार कर भाग गया।
हालांकि नरेश घायल होने से बाल-बाल बच गया था। नरेश ने अगले दिन घटना की तहरीर पुलिस को दी थी, लेकिन जांच के नाम पर टरकाने वाली पुलिस ने आज तक न तो जांच की और न ही घटना की रिपोर्ट दर्ज की थी। यदि पुलिस घटना की रिपोर्ट दर्ज कर खुलासे का प्रयास करती तो घटना होने से बच सकती थी।
ग्रामीणों की मानें तो नरेश को आशंका थी कि चोर गांव का ही है। वह कई दिनों से चोर की तलाश भी कर रहा था। बताते हैं कि तलाश के दौरान उसने कई लोगों से चोर को पहचान होने की बात भी कही थी। घायल के घरवालों और ग्रामीणों का कहना है कि हो सकता है कि शिनाख्त होने और पकड़े जाने के भय से धारदार हथियार से हमला करने वाले चोर ने ही उस पर गोली चलाई हो। पुलिस भी इस बात को मान रही है।
वहीं सीओ निर्मल कुमार विष्ट का कहना है कि इस बात की संभावना है कि घायल नरेश ने चोर की पहचान लिया होगा। जिसके प्रतिशोध ने घटना हुई है।
सीओ-एसओ के बयानों में विरोधाभाष
घायल नरेश के घर चोरी की वारदात की रिपोर्ट दर्ज करने को लेकर सीओ निर्मल कुमार विष्ट और एसओ धनंजय सिंह के बयान अलग-अलग है। सीओ का कहना है कि पीड़ित ने घटना की तहरीर नहीं दी थी, जबकि एसओ धनंजय सिंह तहरीर मिलने की बात तो स्वीकार करते हैं, लेकिन रिपोर्ट दर्ज न होने के बाबत उनका कहना है कि घटना जांच में झूठी पाई गई थी।