उत्तराखंड
की कोतवाली सितारगंज पुलिस ने बुधवार की शाम शहर के थाना सुनगढ़ी क्षेत्र
में स्थित एक कबाड़ की दुकान में छापा मारा। पुलिस ने दुकान से उत्तराखंड
से चोरी कर लाने के बाद काटे गए डंपर के कुछ पार्ट्स बरामद कर कबाड़ी के
भाई यूनुस समेत चार अन्य को हिरासत में लिया है। बाद में सभी को पकड़कर
सितारगंज वापस लौट गई।
बुधवार की शाम सितारगंज पुलिस की टीम सब
इंस्पेक्टर दिनेश कुमार के नेतृत्व में थाना सुनगढ़ी पहुंची और सुनगढ़ी
पुलिस के साथ मंडी गेट पर स्थित एक कबाड़ की दुकान पर छापा मारा। छापे के
दौरान कबाड़ी तो नहीं मिला, लेकिन दुकान पर बैठा उसका भाई पुलिस के हाथ चढ़
गया। तलाशी के दौरान पुलिस ने हफ्ते भर पहले चोरी कर लाने के बाद काटे गए
डंपर के कई पार्ट्स बरामद किए हैं।
पुलिस ने पकड़े गए कबाड़ी के भाई से
पूछताछ करने के बाद शहर में कई अन्य स्थानों पर छापेमारी की और चार अन्य
लोगों को दबोच लिया। प्रभारी निरीक्षक बृजेश सिंह ने बताया कि हफ्ते भर
पहले सितारगंज से एक डंफर चोरी हुआ था। जिसे चोरों ने सुनगढ़ी क्षेत्र में
कबाड़ी के हाथ बेच दिया। जिसकी रिपोर्ट थाना सितारगंज पर दर्ज है।
सितारगंज पुलिस पकड़े गए पांचों आरोपियों को साथ लेकर वापस लौट गई।
खादी-खाकी की सरपरस्ती में चल रहा अवैध धंधा
टीएन अवस्थी
पीलीभीत। शहर में ट्रकों को अवैध ढंग से काटे जाने का कारोबार खादी व खाकी के संरक्षण में लंबे अर्से से चल रहा है। यह बात सितारगंज पुलिस के छापा मारने के दौरान सामने आई। पकड़े गए कबाड़ियों की पैरवी में सत्तापक्ष के नेता खुलकर सामने आ गए और आसाम पुलिस चौकी पर कबाड़ियों को छुड़ाने की जीतोड़ कोशिश की, लेकिन सितारगंज पुलिस के सामने उनकी एक नहीं चली। ट्रकों के अवैध तरीके से काटने के मामले में जिले में भाजपा के एक पूर्व विधायक व सपा के कुछ नेताओं के भी नाम सामने आए हैं।
शहर में चोरी कर लाने वाले ट्रकों को काटे जाने का धंधा कोई नया नहीं हैं। यह अवैध कारोबार खादी व खाकी की मिलीभगत से छतरी चौराहा से लेकर नौगवां और ईदगाह तक खुलेआम होता है। जब खाकी कार्रवाई को कदम उठाती है, तो खादी के हावी होने के कारण उसे बैकफुट पर आना पड़ता है। उत्तराखंड पुलिस ने जब मंडी गेट के पास कबाड़ की दुकान पर छापा मारा तो छापे की खबर शहर में आग की तरह फैल गई।
इसी बीच सत्तापक्ष के कई असरदार नेता भी आसाम पुलिस चौकी पहुंचे और वहां उत्तराखंड पुलिस पर आरोपियों को छोड़े जाने का दबाव बनाने लगे। पुलिस ने जब इंकार किया तो एक नेता ने प्रदेश के एक मंत्री के कैंप कार्यालय से बात कराने की कोशिश की। पुलिस से जुड़े सूत्रों की मानें तो इस मामले में भाजपा के एक पूर्व विधायक व सत्तापक्ष के कुछ असरदार नेताओं के नाम भी प्रकाश में आए हैं।
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सपा कार्यकर्ता की दुकान पर काटा गया था ट्रक
सूत्रों के मुताबिक छतरी चौराहा व डिग्री कॉलेज चौराहा के बीच जिस दुकान पर दो दिन पहले डंफर काटा गया वह दुकान एक सपा कार्यकर्ता की बताई जा रही है। यही नहीं उसका स्वामी अपने को एक मंत्री का करीबी भी बताता है। सूत्रों के मुताबिक यह डंफर कबाड़ी के हाथ 90 हजार रुपये में बेंचा गया था। इसे दिन में काटा गया था।
यह है नियम
वाहन का जिस जिले का रजिस्ट्रेशन नंबर होता है। वहां के परिवहन विभाग से कंडम वाहन होने का प्रमाणपत्र लेना होता है। उसके बाद कहीं पर भी ट्रक कटवा सकते हैं। वाहन काटने वाले व्यक्ति को इसकी सूचना संबंधित थाने को देनी होती है। पुलिस उसको चेक करती है। वाहन काटने की सूचना परिवहन विभाग को भी देनी होती है, लेकिन कबाड़ी नियम-कायदों को ताक पर रखकर खुलेआम वाहन काटते हैं।
सफेदपोशों पर भी कार्रवाई की तैयारी
डंफर काटने के मामले में भाजपा के एक पूर्व विधायक व सपा के कुछ कद्दावर नेताओं के नाम सामने आने से यह लोग अब उत्तराखंड पुलिस की आंख की किरकिरी बन गए हैं। टीम के प्रभारी दिनेश कुमार ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ करने के बाद प्रकाश में आए सफेदपोश नेताओं के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
वर्जन...
पुलिस समस-समय पर कट रहे वाहनों को चेक करती है, लेकिन यह डंफर पुलिस की नजर में नहीं आ सका। थानेदारों को निर्देश दिए गए हैं कि कटने वाले वाहनों के कागजात कंडम सर्टीफिकेट की ठीक ढंग से पड़ताल कर लें। उसके बाद ही वाहन को कटने दें।
जेके शाही, एसपी