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आखिर दम तोड़ गया निजी अस्पताल में भर्ती किशोर

Sat, 20 Aug 2016 10:50 PM IST
पीलीभीत, ब्यूरो
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शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती किशोर करन को आखिरकार चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। शनिवार को घरवालों की मांग पर तीन चिकित्सकों के पैनल से शव का पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद अग्रिम कार्रवाई तय होगी। 
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न्यूरिया क्षेत्र के ललपुरिया गांव के किसान बबूल के 13 वर्षीय पुत्र करन को पेट दर्द की शिकायत पर 17 अगस्त की शाम स्टेशन रोड स्थित अनुज नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। शुक्रवार को बच्चे के घरवालों ने अस्पताल प्रशासन पर गलत इंजेक्शन लगाने से मौत का आरोप लगाया था। इसकी शिकायत डीएम-एसपी से की गई थी। इधर, अस्पताल के चिकित्सक डीके गंगवार बच्चे को जिंदा बता रहे थे। हंगामा बढ़ने पर सुनगढ़ी इंस्पेक्टर अतुल प्रधान ने सिटी मजिस्ट्रेट को अवगत कराया था। इसके बाद जिला अस्पताल से दो डाक्टर आए। उन्होंने बच्चे के हार्ट के काम करने की बात कही थी, लेकिन घरवाले अपनी बात पर अडिग रहे। पूरे दिन दोनों पक्षों में वार्ता का दौर चलता रहा। रात करीब 12 बजे अस्पताल के डाक्टरों ने करन को मृत घोषित कर दिया। इसकी सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। परिवार का कोई व्यक्ति मौजूद ही नहीं था। कुछ लोग खड़े भी थे, लेकिन उन्होंने भी खुद को अलग बताकर पल्ला झाड़ लिया। शनिवार सुबह पुलिस ने कार्रवाई शुरू करने के लिए घरवालों को बुलाया। घरवालों ने पैनल से पोस्टमार्टम कराने की मांग की। इसके बाद तीन चिकित्सकों के पैनल से शव का पोस्टमार्टम कराया गया। पैनल में जिला चिकित्सालय के डा. डीएन सिंह, डा. ऋषिपाल, डा. राजेश आदि शामिल रहे। किशोर के मृत घोषित किए जाने के बाद से पुलिस हंगामे को लेकर अलर्ट रही। रात में ही अस्पताल पहुंचकर पुलिस बल ने हालात परखे। इसके अलावा सुबह भी काफी देर तक निजी अस्पताल के बाहर दो सिपाहियों की तैनाती रही। 

जिले से बाहर के डॉक्टरों की मांग पर हंगामा
पैनल से पोस्टमार्टम कराने की मांग पर प्रशासनिक अफसरों ने मंजूरी दे दी थी। शव का पोस्टमार्टम शुरू कराया जाने वाला था कि घरवालों की ओर से जिले से बाहर के डाक्टरों द्वारा पोस्टमार्टम कराने की मांग शुरू कर दी गई। इसको लेकर हंगामे की स्थिति बनने लगी। सूचना मिलने पर सीओ सिटी निर्मल कुमार विष्ट ने फोर्स संग मौके पर पहुंचकर बात की। जिला अस्पताल भी गए। घरवालों को समझा-बुझाकर मनाया गया। इसके बाद जिला अस्पताल के तय किए गए पैनल से पोस्टमार्टम शुरू कराया जा सका। 
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भाजपा नेता भी डटे रहे
किशोर की मौत के बाद शनिवार को घरवालों के साथ भाजपा नेता स्वामी प्रवक्तानंद, देवेंद्र सिंह टोनी काफी देर तक पोस्टमार्टम हाउस पर रहे। इसके अलावा ये नेता अफसरों से पैनल गठित कराने की जद्दोजहद में भी लगे रहे। 

‘पहले ही मर चुका था हमारा करन’ 
मृतक किशोर करन के घरवाले अब भी अपनी बात पर अडिग हैं। चिकित्सकों की ओर से कहे जाने के बाद भी उनको यह यकीन नहीं हो रहा था कि शुक्रवार रात तक उनका करन जिंदा था। पोस्टमार्टम हाउस पर भी सभी एक दिन पहले ही रात में उसकी मौत की आशंका जताते रहे। 

...तो बच सकती थी जान!
बच्चे के जिंदा और मृत होने की बात पर घंटों बहस छिड़ी रही। अस्पताल प्रशासन के जिंदा होने की बात को घर वालों ने गंभीरता से नहीं लिया। चिकित्सकों ने उसे शनिवार रात को मृत घोषित किया। इस बात पर यकीन किया जाए तो वेंटीलेटर के बिना वह करीब 24 घंटे तक जीवित रहा। अब सवाल यह है कि अगर वेंटीलेटर सुविधा मुहैया हो जाती तो शायद किशोर की जान बचाई जा सकती थी। 

पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्थिति होगी स्पष्ट
स्थिति स्पष्ट करने के लिए पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है ताकि मरने के समय को लेकर चल रहे विवाद का निपटारा हो सके। उधर, परिवारवाले भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद अग्रिम कार्रवाई तय करने की बात कह रहे हैं। 


शव का पैनल से पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने पर मौत का कारण और समय स्पष्ट हो सकेगा। अभी कोई तहरीर नहीं मिली है। कल दी गई तहरीर ही पुलिस के पास है। 
- अतुल प्रधान, इंस्पेक्टर सुनगढ़ी

मरीज को वेंटीलेटर की जरूरत थी, इसलिए घरवालों को उसे कहीं और ले जाने के लिए पहले ही कह दिया गया था। घरवाले उसको कहीं और ले जाने को राजी नहीं थे। डीएम को भी पत्र भेजकर स्थिति से अवगत करा दिया था। मरीज की जान बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया गया। अस्पताल में मौजूद संसाधनों के जरिए उसका इलाज जारी रखा गया। रात साढ़े दस बजे तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। बचाने की कोशिश करते रहे, लेकिन उसकी मौत हो गई। 
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-डा. डीके गंगवार, चिकित्सक
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