बारिश और ओले से बर्बाद हुई फसल से सदमे में आए विकलांग किसान आशुतोष माझी(38) की रविवार को मौत हो गई। परिवारीजनों का कहना है कि उसकी एक एकड़ गेहूं की फसल बारिश और अतिवृष्टि में काफी तबाह हो गई थी। उस पर साहूकारों का करीब 60 हजार रुपये का कर्ज भी था। वह चार-पांच दिनों से काफी परेशान था। कई बार वह घर में कह चुका था कि साहूकारों का कर्ज व बड़ी बेटी की शादी वह कैसे करेगा कुछ समझ में नहीं आ रहा है। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
आशुतोष माझी काफी गरीब परिवार से था। पिता विश्वनाथ से बंटवारे में उसे महज एक एकड़ जमीन मिली थी। यह जमीन न सिर्फ जंगल किनारे है बल्कि काफी नीची भी है। घरवालों के मुताबिक इस जमीन पर हल्की बारिश में भी पानी भर जाता था। परिवार के सभी लोगों ने मेहनत कर गेहूं की फसल बोई थी। जंगली जानवरों से फसल को बचाने के लिए वह खेत पर रुकता था। दोपहर और शाम को खाना खाने के बाद खेत पर चला जाता था। शनिवार की शाम खाना खाकर वह खेत पर चला गया था।
आशुतोष की बड़ी बेटी 18 वर्षीय अनुराधा माझी ने बताया कि रविवार सुबह करीब साढ़े सात बजे उसकी छोटी बहन ऋतका खेत पर पिता को चाय देने गई थी। जब वह मडै़या में पिता को आवाज दी तो नहीं बोले। इस पर ऋतका ने पिता को हिलाया तो वह मृत मिले। बहन के रोने-बिलखने पर खेतों की ओर गए कॉलोनी के कुछ लोग पहुंचे और घटना की जानकारी घर वालों को दी।
परिवार के मुताबिक पिछले दिनों हुई बारिश व अतिवृष्टि से उसकी फसल बर्बाद हो गई थी। फसल पर साहूकारों से करीब 60 हजार रुपये कर्ज भी ले रखा था। वह इस साल अपनी बड़ी पुत्री अनुराधा के हाथ पीले करना चाहता था लेकिन बारिश व ओलावृष्टि से बर्बाद फसल को देख वह काफी तनाव में रहने लगा था। शुक्रवार को हुई बारिश से उसे अपनी बची फसल के भी नुकसान होने का अंदेशा दिखाई दिया। आशंका जताई जा रही है कि सदमे से ही उसकी मौत हो गई होगी।
वहीं प्रभारी निरीक्षक अशोक बुद्धप्रिय ने बताया कि शव पर चोट आदि के कोई निशान नहीं हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर मौत का वास्तविक कारण पता चल सकेगा।