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अहम की लड़ाई ने छिन लिया सुकून मिल बैठकर ही निकल सकता है रास्ता

Thu, 24 Dec 2015 11:57 PM IST
plibhit
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ईद मिलादुन्नवी के मुबारक मौके पर जहां देश ही नहीं सारे विश्व में खुशियां मनाई जा रही हैं। वहीं शहर में खुशी के इजहार को निकलने वाले जुलूस में अहम की लड़ाई ने शहर का चैन ओर सुकून छीन लिया। ऐसा दुबारा न हो इसके लिए हम सभी को अभी से प्रयास करने होंगे। बेहतर हो मिल बैठकर इसका कोई रास्ता निकाला जाए जिससे अमन चैन कायम रहे। बुधवार की रात बिना अनुमति के जुलूस निकालने के बाद हुई घटना से लोग आहत हैं। साथ ही इसका समाधान निकालने पर भी चर्चा करने लगे हैं। अमर उजाला ने शहर के प्रमुख लोगों से इस बाबत अपनी राय जानी तो कुछ ऐसी बात निकल कर सामने आई।
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इस्लाम में जिद वाजिब नहीं
शाही जामा मस्जिद के इमाम कारी इजहार अहमद बरकाती का मानना है कि शहर में हुआ बवाल अहम (जिद) की लड़ाई का परिणाम है। हमें अपनी जिद छोड़ अमन चैन करने को आगे आना चाहिए। इस्लाम में जिद वाजिब नहीं है।

खुशियों का पैगाम देता है त्योहार
दरगाह कानपुरी के हाफिज शहनबाज ने कहा कि त्योहार खुशी और भाईचारे का पैगाम देते हैं। शहर में पिछले 70 सालों से चले आ रहे रिवाज को कायम रखना चाहिए। प्रशासन और धार्मिक गुरुओं को बैठाकर इसका सर्वमान्य हल निकालना चाहिए।
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जुलूस पर सबका बराबर हक
कारी अमानत रसूल ने कहा यौमे पैदाइश का त्यौहार किसी एक वर्ग या गुट का नहीं पूरे समाज का है। हर किसी को त्यौहार मनाने और जुलूस मनाने का हक है। नवी के दर पर सभी बराबर हैं। यदि इसका इल्म रखें तो ऐसी दिक्कत ही नहीं आएगी।

बातचीत से हल हो जाते बड़े-बड़े मसले
इमाम संगठन के जिला उपाध्यक्ष हाफिज फईम कहते हैं कि धार्मिक काम मिलजुलकर करना चाहिए। दुनिया में बातचीत से बड़े बड़े मसले हल हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि इमाम संगठन भी इस मामले में प्रयास कर आइंदा साल में जुलूस को शांतिपूर्ण ढंग से निकलने का  प्रयास करेगा।
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