बीसलपुर रोड पर गांव टेहरी के पास गुरुवार की रात करीब आठ बजे दो बाइकों
की हुई भिड़ंत में दो लोगों की मौत होने से उनके घर में कोहराम मच गया है।
पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव घरवालों के हवाले कर दिए हैं।
गुरुवार
की रात लगभग आठ बजे बरेली के मोहल्ला कालीबाड़ी निवासी 34 वर्षीय विजय
कुमार बाइक लेकर दियोरिया से बीसलपुर होते हुए घर वापस लौट रहे थे। बाइक पर
उनके मोहल्ले के ही 60 वर्षीय मोहन सरन भी सवार थे। इधर दियोरिया कोतवाली
क्षेत्र के गांव गुलड़िया निवासी अविवाहित 22 वर्षीय कमला चरन बाइक लेकर
बीसलपुर से अपने गांव लौट रहे थे। उनकी बाइक पर कोतवाली क्षेत्र के गांव
गंझाड़ा निवासी 25 वर्षीय गजेंद्र कुमार भी सवार थे।
रास्ते में गांव
टेहरी के पास दोनों बाइकों की आमने सामने जोरदार भिड़ंत हो गई। इसमें दोनों
बाइकों पर सवार चारों लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। घायलों को बीसलपुर
के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने मोहन
सरन को मृत घोषित कर दिया। बाकी तीनों घायलों को हालत गंभीर होने पर जिला
अस्पताल रेफर कर दिया गया था।
गंभीर रूप से घायल कमला चरन ने जिला
अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया। सूचना मिलने पर घायलों के घर
वाले रात में ही जिला अस्पताल पहुंच गए थे। पुलिस ने शुक्रवार को मृतकों के
शवों का पोस्टमार्टम कराने के बाद शव घर वालों के हवाले कर दिए। शव
पहुंचते ही घरों में कोहराम मच गया। कमलाचरन का शव दोपहर बाद घर पहुंचा।
देर शाम को गमगीन माहौल में शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। मृतक कमलाचरन
की मां चंपा देवी, भाई रामऔतार, राधेश्याम, गंगाधर और बहन रामबेटी का
रो-रोकर बुरा हाल है।
कमला चरन की मौत के गम में दुकानें रहीं बंद
दियोरिया।
कोतवाली क्षेत्र के गांव गुलडिय़ा में कमला चरन की मौत से मातम छा गया है।
शुक्रवार की शाम गमगीन माहौल में शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया है। इस
शोक में शुक्रवार को गांव की दुकानें भी बंद रही।
गांव गुलडिय़ा निवासी
22 वर्षीय अविवाहित कमला चरन की बृहस्पतिवार की रात बीसलपुर रोड पर गांव
टेहरी के पास सड़क हादसे में दर्दनाक मौत हो गई थी। पुलिस ने शुक्रवार को
पोस्टमार्टम कराने के बाद शव घर वालों के हवाले कर दिया था। दोपहर बाद शव
घर आ गया था। शव आते ही घर में कोहराम मच गया था। शाम को गमगीन माहौल में
शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया, जिसमें गांव के अधिकांश लोगों ने भाग
लिया। इस शोक में गांव की दुकानें बंद रहीं। गांव के लोग कमला चरन की मौत
से काफी दुखी है। पूरे गांव में शुक्रवार को सन्नाटा पसरा रहा। दरअसल कमला
चरन काफी व्यवहार कुशल और मिलनसार युवक था। वह सबके सुख-दुख मेें शामिल
होता था। घर की जर्जर आर्थिक व्यवस्था होने के कारण वह गांव गंझाड़ा स्थित
एक प्राइवेट कंपनी के टावर पर चौकीदारी करता था। उसके वेतन से ही उसके घर
की अधिकांश व्यवस्थाएं चलती थी। दरअसल चंपा देवी के पास रोजी रोटी के नाम
पर केवल दो बीघा जमीन है। चंपा देवी के अन्य तीन पुत्र भी मेहनत मजदूरी ही
करते हैं। चंपा देवी और उसके घर के अन्य लोग कमला चरन की मौत के बाद यह
सोंच कर काफी परेशान है कि अब उनकी गृहस्थी कैसे चलेगी।
मां की बात मान लेता तो टल सकता था हादसा
दियोरिया। गांव गुलडिय़ा निवासी कमला चरन यदि बृहस्पतिवार को अपनी मां की बात मान लेता तो हादसा टल सकता था।
दरअसल
कमला चरन गांव गंझाड़ा से बृहस्पतिवार को गांव गुलडिय़ा स्थित अपने घर आया
था। घर में कुछ देर ठहरने के बाद वह बीसलपुर जाने के लिए तैयार होने लगा
था। मां चंपा देवी ने कमला चरन को बीसलपुर जाने से रोका था, लेकिन कमला चरन
जरूरी काम होना बता कर बीसलपुर चला गया था और बीसलपुर से लौटते समय गांव
टेहरी के पास हादसा हो गया और वह मौत के मुंह मे समा गया।