शारदा नदी के पार ढकिया ताल्लुके महाराजपुर, रमनगरा व गुन्हान क्षेत्र में पट्टेदारों की भूमि की आड़ में टाइगर रिजर्व सहित बेनामी संपत्ति पर भी अतिक्रमण शुरू हो गया। इन दिनों करीब एक दर्जन ट्रैक्टर अतिक्रमण करने को जुताई करने में जुटे हैं।
शारदा नदी के पार वैसे तो पिछले वर्षों में भी पट्टेदारों की भूमि की आड़ में अतिक्रमण हो रहा था, अब बरसात समाप्त होने के बाद एक बार फिर से अतिक्रमण का खेल शुरू हो गया है। करीब एक दर्जन ट्रैक्टर शारदा नदी के घाट से पार पहुंच चुके हैं। जो इंडो नेपाल सीमा के पिलर नंबर 27 से लेकर 29 के मध्य शारदा नदी के किनारे तक ढकिया ताल्लुके महाराजपुर के अलावा रमनगरा व गुन्हान क्षेत्र में जुताई कर अतिक्रमण करने में जुटे हैं। सीमा पिलर नंबर 28 के निकट सौ एकड़ से अधिक राजस्व अभिलेखों में बेनामी संपत्ति दर्ज है। अतिक्रमणकारियों ने इसका फायदा उठाते हुए राजस्व कर्मियों की सांठगांठ से समूची जमीन पर अतिक्रमण कर लिया है और गेहूं की बुवाई की जा रही है। कुछ क्षेत्र में गन्ने की भी फसल खड़ी है।
वनकर्मी अफसरों को कर रहे गुमराह
इस इलाके में कभी सैकड़ों शीशम के पेड़ थे, लेकिन अतिक्रमण के ही चलते यहां पर अवैध कब्जे करने के साथ खेती की जा रही है। टाइगर रिजर्व की जमीन पर भी अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है। शारदा नदी के पार का इलाका होने के कारण वन विभाग के अधिकारी कभी कभार ही पहुंचते हैं और उन्हें भी स्थानीय वनकर्मी ग्राम समाज की जमीन होना बताकर गुमराह कर देते हैं।
डीएफओ ने शुरू की थी कार्रवाई
तत्कालीन डीएम ओएन सिंह के संज्ञान में जब अतिक्रमण का मामला आया तो तत्कालीन डीएफओ राजेश मिश्रा ने उपप्रभागीय वनाधिकारी सहित रेंजर व वनकर्मियों से स्पष्टीकरण तलब करने के साथ उनको निलंबन तक की चेतावनी दे दी थी, लेकिन संयोग से डीएफओ का ट्रांसफर हो गया था।
पट्टेदारों ने की सीमांकन कराने की मांग
इस तरह की भूमि को लेकर गुन्हान के पट्टेदारों की बाढ़ शारणार्थी कॉलोनी के स्कूल में बैठक हुई। जिसमें कहा गया कि जिन लोगों के पट्टे थे, उनके पास आज भी कम भूमि है और दूसरे लोग पट्टों की आड़ में कब्जा करते चले जा रहे हैं। पट्टेदारों ने राजस्व कर्मियों से तत्काल सीमांकन कराकर पट्टेदारों की भूमि देने की बात कही।
नए सिरे से नहीं हो रहा अतिक्रमण
क्षेत्रीय वन रक्षक ओमप्रकाश का कहना है कि टाइगर रिजर्व की जमीन नए सिरे से अतिक्रमण नहीं हो रहा है और सीमांकन न होने की वजह से यहां स्थिति स्पष्ट नहीं है।