अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी जांच शुरू
कांग्रेस ने सदर विधानसभा क्षेत्र के अलावा जिले की अन्य विधानसभा सीटों की मतदाता सूचियों की भी पड़ताल शुरू कराई है। पार्टी यह पता लगाने में जुटी है कि एसआईआर के बाद कहीं अन्य क्षेत्रों में भी एक ही एपिक नंबर पर अलग-अलग मतदाताओं के नाम या पिता के नाम दर्ज होने जैसी विसंगतियां तो नहीं हैं।
सदर विधानसभा क्षेत्र से जुड़े रहे दोनों एसडीएम
प्रशासनिक फेरबदल में जिला मुख्यालय से संबद्ध किए गए एसडीएम मयंक गोस्वामी एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान सदर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली अमरिया तहसील में एसडीएम के पद पर तैनात थे। वहीं, हेमंत चौधरी मौजूदा समय में एसडीएम अमरिया थे।
दोनों अधिकारियों को जिला मुख्यालय से संबद्ध किए जाने के बाद मतदाता सूची के पुनरीक्षण में उनकी भूमिका को लेकर भी चर्चा हो रही है। जिलाधिकारी आलोक कुमार के अनुसार, शुरुआती जांच के आधार पर दोनों अधिकारियों को मुख्यालय से संबद्ध किया गया है। जांच जारी है। मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया को नियमानुसार पूरा कराया जाएगा।
कांग्रेस का दावा: फाइनल ड्राफ्ट जारी होने के बाद बदला गया
प्रदेश कांग्रेस ने एसआईआर के तहत मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए बुधवार को प्रदेश मुख्यालय में प्रेसवार्ता की थी। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने पीलीभीत में 13,150 मतदाताओं के नाम फाइनल ड्राफ्ट लिस्ट जारी होने के बाद बदलने का आरोप लगाया। साथ ही कहा कि पार्टी इस मामले में विधिक राय लेकर न्यायालय भी जाएगी। प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने बताया कि 10 अप्रैल को उप्र में एसआईआर का फाइनल ड्राफ्ट जारी हुआ।
फाइनल ड्राफ्ट जारी होने के बाद वोटर यह आश्वस्त हो जाता है कि उसका सीरियल नंबर, नाम, पता, एपिक नंबर और नाम की स्पेलिंग सही है। किंतु जुलाई से सितंबर के बीच विधानसभा क्षेत्र नंबर 127-पीलीभीत सदर में 13150 मतदाताओं के एपिक नंबर और सीरियल नंबर वही रहते हुए अंदर से नाम बदल दिए गए। यानी वोटर को पता ही नहीं चला कि उसके रिकॉर्ड में बदलाव हो चुका है।
884 ऐसे मतदाताओं के नाम हटा दिए गए जो अभी भी वहां मौजूद हैं और उन्होंने आवेदन देकर बताया कि वे वहीं रहते हैं। 2600 ऐसे वोटर जोड़े गए, जो मौके पर रहते ही नहीं हैं। इस तरह एक विधानसभा में कुल 16554 वोटों का खेल सामने आया है।